Skip to Content
Note SL
  • Home
  • Privacy Policy
  • About
  • Terms and Condition's
  • Assam Veterinary Test
Note SL
      • Home
      • Privacy Policy
      • About
      • Terms and Condition's
      • Assam Veterinary Test

    अध्याय 2

    छोटा जादूगर


    अभ्यासमाला

    बोध एवं विचार

    1. सही विकल्प का चयन करो :

    (क) बाबू जयशंकर प्रसाद का जन्म हुआ था—

    (अ) काशी में

    (आ) इलाहाबाद में

    (इ) पटना में

    (ई) जयपुर में

    उत्तर: (अ) काशी में

    (ख) जयशंकर प्रसाद जी का साहित्यिक जीवन किस नाम से आरंभ हुआ था ?

    (अ) 'विद्याधर' नाम से

    (आ) 'कलाधर' नाम से

    (इ) 'ज्ञानधर' नाम से

    (ई) 'करुणाधर' नाम से

    उत्तर: (आ) 'कलाधर' नाम से

    (ग) प्रसाद जी का देहावसान हुआ—

    (अ) 1935 ई. में

    (आ) 1936 ई. में

    (इ) 1937 ई. में

    (ई) 1938 ई. में

    उत्तर: (इ) 1937 ई. में

    (घ) कार्निवाल के मैदान में लड़का चुपचाप किनको देख रहा था ?

    (अ) चाय पीने वालों को

    (आ) मिठाई खाने वालों को

    (इ) गाने वालों को

    (ई) शरबत पीने वालों को

    उत्तर: (ई) शरबत पीने वालों को

    (ङ) लड़के को जादूगर का कौन-सा खेल अच्छा मालूम हुआ ?

    (अ) खिलौने पर निशाना लगाना

    (आ) चूड़ी फेंकना

    (इ) तीर से नम्बर छेदना

    (ई) ताश का खेल दिखाना

    उत्तर: (अ) खिलौने पर निशाना लगाना

    2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो:

    (क) जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित प्रथम कहानी का नाम क्या है?

    उत्तर: जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित प्रथम कहानी का नाम 'ग्राम' है।

    (ख) प्रसाद जी द्वारा विरचित महाकाव्य का नाम बताओ।

    उत्तर: प्रसाद जी द्वारा विरचित सुप्रसिद्ध महाकाव्य का नाम 'कामायनी' है।

    (ग) लड़का जादूगर को क्या समझता था? 

    उत्तर: लड़का जादूगर को बिल्कुल निकम्मा समझता था और उसका मानना था कि उससे अच्छा ताश का खेल वह स्वयं दिखा सकता है।

    (घ) लड़का तमाशा देखने परदे में क्यों नहीं गया था? 

    उत्तर: लड़का तमाशा देखने परदे के भीतर इसलिए नहीं गया था क्योंकि वहाँ जाने के लिए टिकट लगता था और उसके पास पैसे नहीं थे।

    (ङ) श्रीमान ने कितने टिकट खरीद कर लड़के को दिए थे? 

    उत्तर: श्रीमान ने बारह (12) टिकट खरीदकर लड़के को दिए थे।

    (च) लड़के ने हिंडोले से अपना परिचय किस प्रकार दिया था? 

    उत्तर: लड़के ने हिंडोले (झूले) के ऊपर से पुकारते हुए अपना परिचय "छोटा जादूगर" कहकर दिया था।

    (छ) बालक (छोटे जादूगर) को किसने बहुत ही शीघ्र चतुर बना दिया था? 

    उत्तर: बालक (छोटे जादूगर) को उसकी आवश्यकता (घर की आर्थिक तंगी और जिम्मेदारी) ने बहुत ही शीघ्र चतुर बना दिया था।

    (ज) श्रीमान कलकत्ते में किस अवसर पर की छुट्टी बिता रहे थे? 

    उत्तर: श्रीमान कलकत्ते में 'बड़े दिन' (क्रिसमस) के अवसर की छुट्टी बिता रहे थे।

    (झ) सड़क के किनारे कपड़े पर सजे रंगमंच पर खेल दिखाते समय छोटे जादूगर की वाणी में स्वभावसुलभ प्रसन्नता की तरी क्यों नहीं थी? 

    उत्तर: क्योंकि उसकी माँ की हालत बहुत खराब थी और माँ ने उसे कहा था कि उसका अंतिम समय (घड़ी) समीप है, इसलिए वह मानसिक रूप से बहुत दुखी और व्यग्र था।

    (ञ) मृत्यु से ठीक पहले छोटे जादूगर की माँ के मुँह से कौन-सा अधूरा शब्द निकला था? 

    उत्तर: मृत्यु से ठीक पहले छोटे जादूगर की माँ के मुँह से "बे..." (जो शायद 'बेटा' कहना चाहती थी) अधूरा शब्द निकला था।

    3. अति संक्षिप्त उत्तर (लगभग 25 शब्द):

    (क) बाबू जयशंकर प्रसाद की बहुमुखी प्रतिभा का परिचय किन क्षेत्रों में मिलता है?

    उत्तर: बाबू जयशंकर प्रसाद की बहुमुखी प्रतिभा का परिचय कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास और निबंध जैसे विभिन्न साहित्यिक क्षेत्रों में मिलता है। वे छायावाद के प्रमुख स्तंभ और एक दार्शनिक रचनाकार थे।

    (ख) श्रीमान ने छोटे जादूगर को पहली भेंट के दौरान किस रूप में देखा था? 

    उत्तर: पहली भेंट में लेखक ने उसे कार्निवल के मैदान में शरबत पीने वालों को चुपचाप देखते हुए देखा । उसके गले में सूत की रस्सी और जेब में ताश के पत्ते थे ।

    (ग) "वहाँ जाकर क्या कीजिएगा?" छोटे जादूगर ने ऐसा कब कहा था? 

    उत्तर: जब लेखक ने छोटे जादूगर को उस परदे के अंदर ले जाने की बात कही जहाँ जाने के लिए टिकट लगता था, तब उसने लेखक से यह प्रश्न पूछा था ।

    (घ) निशानेबाज के रूप में छोटे जादूगर की कार्य-कुशलता का वर्णन करो। 

    उत्तर: छोटा जादूगर एक पक्का निशानेबाज था । खेल के मैदान में लेखक द्वारा दिलाए गए बारह टिकटों से उसने बारह बार निशाना लगाया और उसका एक भी गेंद खाली नहीं गया ।

    (ङ) कलकत्ते के बोटानिकल उद्यान में श्रीमान-श्रीमती को छोटा जादूगर किस रूप में मिला था? 

    उत्तर: वह कंधे पर खादी का झोला लटकाए, साफ जाँघिया और आधी बाँहों का कुरता पहने हुए मिला । उसने हाथ में ताश के पत्तों और खिलौनों के साथ अपना खेल दिखाने का प्रस्ताव रखा ।

    (च) कलकत्ते के बोटानिकल उद्यान में श्रीमान ने जब छोटे जादूगर को 'लड़के !' कहकर संबोधित किया, तो उत्तर में उसने क्या कहा? 

    उत्तर: उसने गर्व से कहा कि उसे 'छोटा जादूगर' कहा जाए, क्योंकि यही उसका नाम है और इसी नाम से उसकी आजीविका चलती है ।

    (छ) "आज तुम्हारा खेल जमा क्यों नहीं ?"— इस प्रश्न के उत्तर में छोटे जादूगर ने क्या कहा? 

    उत्तर: उसने अविचल भाव से उत्तर दिया कि उसकी माँ ने उसे तुरंत घर आने को कहा है क्योंकि उनका अंतिम समय (घड़ी) समीप है ।

    4. संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में) :

    (क) प्रसाद जी की कहानियों की विशेषताओं का उल्लेख करो। 

    उत्तर: जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ भारतीय संस्कृति, राष्ट्रप्रेम और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर मिश्रण होती हैं। उनकी कहानियों में चरित्रों का आंतरिक द्वंद्व और मनोवैज्ञानिक चित्रण प्रमुखता से मिलता है। वे अपनी रचनाओं में तत्सम प्रधान और काव्यात्मक भाषा का प्रयोग करते हैं। 'छोटा जादूगर' की तरह उनकी कहानियाँ प्रायः जीवन के संघर्ष, कर्तव्यपरायणता और विषम परिस्थितियों में अडिग रहने की प्रेरणा देती हैं ।

    (ख) "क्यों जी, तुमने इसमें क्या देखा?" इस प्रश्न का उत्तर छोटे जादूगर ने किस प्रकार दिया था? 

    उत्तर: लेखक के इस प्रश्न पर छोटे जादूगर ने बड़ी प्रगल्भता और आत्मविश्वास के साथ उत्तर दिया । उसने कहा कि उसने वहाँ सब कुछ देखा है, जैसे चूड़ी फेंकना, खिलौनों पर निशाना लगाना और तीर से नंबर छेदना । उसने यह भी कहा कि उसे खिलौनों पर निशाना लगाना सबसे अच्छा लगा और वहाँ का जादूगर उसे बिल्कुल निकम्मा लगा, क्योंकि उससे बेहतर ताश का खेल वह स्वयं दिखा सकता है ।

    (ग) अपने माँ-बाप से संबंधित प्रश्नों के उत्तर में छोटे जादूगर ने क्या-क्या कहा था? 

    उत्तर: जब लेखक ने उसके परिवार के बारे में पूछा, तो बालक ने गर्व से बताया कि उसके बाबूजी देश के लिए जेल में हैं । माँ के बारे में उसने बताया कि वह बीमार है । उसने स्पष्ट किया कि वह यहाँ तमाशा देखने नहीं, बल्कि दिखाने आया है ताकि कुछ पैसे कमाकर अपनी बीमार माँ के लिए पथ्य (दवा और भोजन) का प्रबंध कर सके और अपना पेट भर सके ।

    (घ) श्रीमान ने तेरह-चौदह वर्ष के छोटे जादूगर को किसलिए आश्चर्य से देखा था? 

    उत्तर: लेखक ने उस तेरह-चौदह वर्ष के बालक को आश्चर्य से इसलिए देखा क्योंकि इतनी कम उम्र में भी उसमें अद्भुत आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना थी । जब बालक ने कहा कि वह शरबत पीने के बजाय खेल दिखाकर पैसे कमाना अधिक पसंद करेगा ताकि माँ की सेवा कर सके, तो उसकी यह स्वाभिमानी और परिपक्व बात सुनकर लेखक दंग रह गए ।

    (ङ) श्रीमती के आग्रह पर छोटे जादूगर ने किस प्रकार अपना खेल दिखाया? 

    उत्तर: श्रीमती की वाणी में माँ जैसी मिठास पाकर छोटे जादूगर ने उत्साह से अपना खेल शुरू किया । उसने कार्निवल के खिलौनों के माध्यम से अभिनय दिखाया, जिसमें भालू का मनाना, बिल्ली का रूठना और बंदर का घुड़कना शामिल था । उसने गुड़िया और गुड्डे के ब्याह का प्रहसन दिखाया । ताश के पत्तों का रंग बदलना और सूत की डोरी को जोड़कर दिखाना उसकी कलाकारी का हिस्सा था ।

    (च) हवड़ा की ओर आते समय छोटे जादूगर और उसकी माँ के साथ श्रीमान की भेंट किस प्रकार हुई थी? 

    उत्तर: जब लेखक अपनी मोटर से हवड़ा की ओर जा रहे थे, तब अचानक उन्हें एक झोंपड़ी के पास छोटा जादूगर कंधे पर कम्बल डाले खड़ा दिखाई दिया । लेखक ने मोटर रोककर उससे पूछा तो उसने बताया कि उसकी माँ वहीं है और अस्पताल वालों ने उसे निकाल दिया है । झोंपड़ी के भीतर लेखक ने उसकी माँ को चिथड़ों में लिपटी हुई काँपते हुए देखा ।

    (छ) सड़क के किनारे कपड़े पर सजे रंगमंच पर छोटा जादूगर किस मनःस्थिति में और किस प्रकार खेल दिखा रहा था? 

    उत्तर: छोटा जादूगर अत्यंत व्यग्र और दुखी मनःस्थिति में था क्योंकि उसकी माँ का अंतिम समय निकट था । उसकी वाणी में वह पुरानी प्रसन्नता और चमक नहीं थी । वह दूसरों को हँसाने की कोशिश तो कर रहा था, लेकिन स्वयं भीतर से काँप रहा था । उसके रोएँ जैसे रो रहे थे, फिर भी वह केवल कर्तव्य और मजबूरी के कारण खेल दिखा रहा था ।

    (ज) छोटे जादूगर और उसकी माँ के साथ श्रीमान की अंतिम भेंट का अपने शब्दों में वर्णन करो। 

    उत्तर: अंतिम भेंट अत्यंत हृदयविदारक थी। लेखक उसे अपनी मोटर में बैठाकर जल्दी से उसकी झोंपड़ी तक ले गए । वहाँ पहुँचते ही बालक 'माँ-माँ' पुकारते हुए भीतर घुसा । माँ के मुँह से केवल अधूरा शब्द 'बे...' निकल पाया और उनके प्राण पखेरू उड़ गए । बालक अपनी मृत माँ से लिपटकर रोने लगा । उस उज्ज्वल धूप में लेखक को सारा संसार जादू जैसा स्तब्ध और नृत्य करता प्रतीत हुआ ।

    5. सम्यक उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में) :

    (क) बाबू जयशंकर प्रसाद की साहित्यिक देन का उल्लेख करो। 

    उत्तर: बाबू जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के 'छायावाद' युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं । उनकी साहित्यिक देन अत्यंत विशाल और प्रभावशाली है। उन्होंने काव्य, नाटक, कहानी, उपन्यास और निबंध जैसी विधाओं में कालजयी रचनाएँ दी हैं। उनका महाकाव्य 'कामायनी' हिंदी साहित्य की एक अनमोल धरोहर है । नाटकों के क्षेत्र में उन्होंने 'चंद्रगुप्त', 'स्कंदगुप्त' और 'ध्रुवस्वामिनी' जैसे ऐतिहासिक नाटक लिखकर भारतीय गौरव को पुनर्जीवित किया। उनकी कहानियाँ मानवीय संवेदनाओं, राष्ट्रीयता और दार्शनिक विचारों से ओत-प्रोत होती हैं। 'आकाशदीप', 'पुरस्कार' और 'ममता' जैसी कहानियों के माध्यम से उन्होंने त्याग और बलिदान के उच्च आदर्श प्रस्तुत किए हैं। प्रसाद जी की भाषा परिमार्जित, तत्सम प्रधान और काव्यात्मक है, जिसने हिंदी गद्य को नई ऊँचाई और गंभीरता प्रदान की।

    (ख) छोटे जादूगर के मधुर व्यवहार एवं स्वाभिमान पर प्रकाश डालो। 

    उत्तर: 'छोटा जादूगर' कहानी का मुख्य पात्र एक बालक है, जिसका व्यवहार अत्यंत मधुर और हृदय को छू लेने वाला है। पहली भेंट में ही वह अपनी वाक्पटुता से लेखक को आकर्षित कर लेता है । श्रीमती जी के साथ उसका व्यवहार एक आज्ञाकारी पुत्र की तरह विनम्र है । उसके चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता उसका स्वाभिमान है। वह अपनी गरीबी के बावजूद किसी के सामने हाथ नहीं फैलाता। जब लेखक उसे शरबत पिलाने की बात करते हैं, तो वह कहता है कि उसे शरबत के बजाय खेल दिखाने का मौका मिलता, तो उसे अधिक प्रसन्नता होती । वह मुफ़्त की मदद नहीं चाहता, बल्कि अपनी मेहनत और कला से पैसे कमाकर स्वावलंबन के साथ जीना चाहता है ।

    (ग) छोटे जादूगर की चतुराई और कार्य-कुशलता का वर्णन करो। 

    उत्तर: छोटा जादूगर उम्र में छोटा होते हुए भी अपनी चतुराई और कार्य-कुशलता में निपुण है। कार्निवल के मैदान में वह अपनी प्रगल्भता से बताता है कि वह पेशेवर जादूगर से बेहतर ताश का खेल दिखा सकता है । उसकी कार्य-कुशलता का प्रमाण तब मिलता है जब वह बारह टिकटों पर लगातार सटीक निशाना लगाकर बारह खिलौने जीत लेता है । वह केवल जादू के हाथ की सफाई ही नहीं जानता, बल्कि वह एक अच्छा अभिनेता भी है। अपने खेल में वह बिल्ली के रूठने, भालू के मनाने और गुड्डा-गुड़िया के ब्याह जैसे अभिनय के माध्यम से लोगों का भरपूर मनोरंजन करता है । उसकी वाचालता और परिस्थितियों को समझने की शक्ति उसे एक कुशल कलाकार बनाती है।

    (घ) छोटे जादूगर के देश-प्रेम और मातृ-भक्ति का परिचय दो। 

    उत्तर: छोटे जादूगर के चरित्र में देश-प्रेम और मातृ-भक्ति का अद्भुत संगम है। उसके पिता देश की स्वतंत्रता के लिए जेल में हैं, और बालक इस बात को अत्यंत गर्व के साथ बताता है । यह उसके परिवार के कूट-कूट कर भरे देश-प्रेम को दर्शाता है। उसकी मातृ-भक्ति तो और भी महान है। अपनी बीमार माँ की सेवा और दवा के लिए वह दिन-रात मेहनत करता है । माँ की खराब हालत और उनके अंतिम समय की चेतावनी के बावजूद वह खेल दिखाने निकलता है ताकि वह अपनी मरती हुई माँ के लिए भोजन और कम्बल का प्रबंध कर सके । अपनी माँ से लिपटकर उसका रोना उसकी गहरी ममता और भक्ति को प्रकट करता है ।

    (ङ) छोटे जादूगर की कहानी से तुम्हें कौन-सी प्रेरणा मिलती है? 

    उत्तर: 'छोटा जादूगर' कहानी हमें विषम परिस्थितियों में धैर्य और साहस के साथ जीने की प्रेरणा देती है। यह सिखाती है कि आयु छोटी होने पर भी मनुष्य अपने उत्तरदायित्वों को पूरी निष्ठा से निभा सकता है। बालक का चरित्र हमें स्वावलंबन और मेहनत का महत्व सिखाता है; वह भीख मांगने के बजाय अपनी कला का प्रदर्शन कर सम्मान के साथ अपनी आजीविका कमाता है । यह कहानी हमें कठिन समय में भी अपने स्वाभिमान को बनाए रखने और अपने परिवार, विशेषकर माता-पिता के प्रति अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि रखने की शिक्षा देती है। संक्षेप में, यह कहानी हमें एक कर्मठ, स्वाभिमानी और संवेदनशील इंसान बनने के लिए प्रेरित करती है जो अभावों में भी हार नहीं मानता।

    6. सप्रसंग व्याख्या करो :

    (क) "मैं उसकी ओर न जाने क्यों आकर्षित हुआ। उसके अभाव में भी संपूर्णता थी।"

    उत्तर: संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'आलोक भाग-2' में संकलित जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कहानी 'छोटा जादूगर' से ली गई हैं।

    प्रसंग: यह अंश उस समय का है जब लेखक कार्निवल के मैदान में पहली बार उस छोटे बालक को देखते हैं।

    व्याख्या: लेखक कहते हैं कि मेले की चकाचौंध के बीच उस बालक की सादगी और उसके चेहरे पर व्याप्त गंभीरता ने उन्हें अपनी ओर खींच लिया। बालक के पास संसाधनों का भारी अभाव था—फटे कपड़े और गले में सूती रस्सी, फिर भी उसके व्यक्तित्व में एक प्रकार की संपूर्णता थी। यह संपूर्णता उसके आत्मविश्वास, स्वाभिमान और अपनी परिस्थितियों को स्वीकार करने के साहस से उपजी थी। वह अभावग्रस्त होकर भी लाचार नहीं दिख रहा था, बल्कि उसमें अपने पैरों पर खड़े होने का एक गरिमापूर्ण तेज था।

    (ख) "श्रीमती की वाणी में वह माँ की सी मिठास थी, जिसके सामने किसी भी लड़के को रोका नहीं जा सकता।"

    उत्तर: संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'आलोक भाग-2' में संकलित जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कहानी 'छोटा जादूगर' से ली गई हैं।

    प्रसंग: यह अंश तब का है जब बोटानिकल उद्यान में लेखक की पत्नी बालक को खेल दिखाने के लिए बड़े प्यार से बुलाती हैं।

    व्याख्या: लेखक यहाँ ममता और स्नेह की शक्ति का वर्णन कर रहे हैं। छोटा जादूगर, जो संसार की कठोरता और तिरस्कार का सामना कर रहा था, श्रीमती जी के शब्दों में छिपी ममता को पहचान लेता है। उनकी आवाज़ में एक ऐसी आत्मीयता और माँ जैसी मिठास थी, जो किसी भी बालक के संकोच को दूर कर सकती थी। उस स्नेह भरे निमंत्रण का जादू ऐसा था कि वह बालक बिना किसी हिचकिचाहट के अपना खेल दिखाने को तैयार हो गया। यह पंक्ति सिद्ध करती है कि प्रेम और सम्मान से किसी भी व्यक्ति का हृदय जीता जा सकता है।

    भाषा एवं व्याकरण-ज्ञान

    1. सरल, मिश्र और संयुक्त वाक्यों को पहचानो :

    (क) कार्निवल के मैदान में बिजली जगमगा रही थी। 

    उत्तर: सरल वाक्य (इसमें एक ही मुख्य क्रिया है) ।

    (ख) माँजी बीमार है, इसलिए मैं नहीं गया। 

    उत्तर: संयुक्त वाक्य (दो स्वतंत्र वाक्य 'इसलिए' अव्यय से जुड़े हैं) ।

    (ग) मैं घूमकर पान की दुकान पर आ गया। 

    उत्तर: सरल वाक्य (यह एक सीधा और सरल विधान है) ।

    (घ) माँ ने कहा है कि आज तुरंत चले आना। 

    उत्तर: मिश्र वाक्य (इसमें मुख्य उपवाक्य के साथ 'कि' से जुड़ा आश्रित उपवाक्य है) ।

    (ङ) मैं भी पीछे था, किंतु स्त्री के मुँह से 'बे...' निकलकर रह गया। 

    उत्तर: संयुक्त वाक्य (दो पूर्ण विचार 'किंतु' संयोजक से जुड़े हैं) ।

    2. अर्थ लिखकर निम्नांकित मुहावरों का वाक्य में प्रयोग करो :

    नौ दो ग्यारह होना, आँखें बदल जाना, घड़ी समीप होना, दंग रह जाना, श्रीगणेश होना, अपने पाँवों पर खड़ा होना, अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मारना

    उत्तर: नौ दो ग्यारह होना: (भाग जाना) — पुलिस को देखते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गया ।

    आँखें बदल जाना: (व्यवहार में परिवर्तन आना) — मुसीबत के समय कई बार अपनों की भी आँखें बदल जाती हैं ।

    घड़ी समीप होना: (मृत्यु का समय निकट होना) — माँ की घड़ी समीप थी, इसलिए छोटा जादूगर उदास था ।

    दंग रह जाना: (आश्चर्यचकित होना) — बालक का अचूक निशाना देखकर सब दंग रह गए ।

    श्रीगणेश होना: (शुरुआत करना) — आज हमने अपनी नई दुकान का श्रीगणेश किया है।

    अपने पाँवों पर खड़ा होना: (स्वावलंबी बनना) — छोटा जादूगर अपनी मेहनत से अपने पाँवों पर खड़ा होना चाहता था ।

    अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मारना: (स्वयं का नुकसान करना) — पढ़ाई छोड़कर बुरी संगत में पड़ना अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मारना है।

    3. निम्नलिखित शब्दों के लिंग परिवर्तन करो :

    उत्तर: 

    स्त्रीलिंग (Feminine)पुल्लिंग (Masculine)

    रस्सी

    रस्सा
    जादूगरनी

    जादूगर

    श्रीमती

    श्रीमान

    गुड़िया

    गुड्डा

    वधू

    वर

    स्त्री

    पुरुष
    नायिकानायक
    मालिनमाली

    4. निम्नांकित शब्दों के लिंग निर्धारित करो :

    उत्तर: 

    • रुकावट: स्त्रीलिंग (जैसे: उसकी वाणी में रुकावट थी)

    • हँसी: स्त्रीलिंग (जैसे: हँसी गूँज रही थी)

    • शरबत: पुल्लिंग (जैसे: शरबत पी लिया जाए)

    • वाणी: स्त्रीलिंग (जैसे: श्रीमती की वाणी मधुर थी)

    • भीड़: स्त्रीलिंग (जैसे: मनुष्यों की भीड़ जमा थी)

    • तिरस्कार: पुल्लिंग (जैसे: उसके मुँह पर तिरस्कार था)

    • निशाना: पुल्लिंग (जैसे: उसका निशाना पक्का था)

    • झील: स्त्रीलिंग (जैसे: वह एक छोटी-सी झील थी)

    5. निम्नलिखित शब्दों के वचन परिवर्तन करो :

    उत्तर: 

    एकवचन (Singular)बहुवचन (Plural)
    खिलौना

    खिलौने

    आँख

    आँखें

    दुकान

    दुकानें

    छात्राछात्राएं
    बिल्ली

    बिल्लियाँ

    साधुसाधु (अपरिवर्तित रहता है)
    कहानी

    कहानियाँ


























    Student Review & Feedback

    আপোনাৰ মূল্যৱান মতামত দিয়ক (Share your thoughts & reviews)

    ⏳ Reviews will be verified & published within 24 hours

    📌 পৰীক্ষিত আৰু প্ৰকাশিত মতামত (Verified Reviews)

    🔒 100% Verified

    Loading verified reviews...

    ⏳

    মতামত সফলতাৰে জমা হ'ল!

    Thank you! Your feedback has been received.

    আপোনাৰ মতামত সংৰক্ষণ কৰা হৈছে। সুৰক্ষা আৰু পৰীক্ষণৰ পাছত ২৪ ঘণ্টাৰ ভিতৰত ইয়াক ৱেবচাইটত প্ৰকাশ কৰা হ'ব।












    🚨 Submit Complaint 🚨
    Hii, মই Doli Maam
    কিবা Problem আছিল নেকি Platformat?
    Doli - NoteSL Student Review And Questions
    ×

    প্ৰশ্ন সোধক (Ask Doli)

    প্ৰশ্ন বাৰ্তা (Greeting)

    ⚠️ প্ৰশ্নৰ উত্তৰ পাবলৈ আমাৰ WhatsApp Channel টো join হোৱাটো বাধ্যতামূলক।

    স্বাগতম, Student! Class details synced
    Please enter your real first and last name in English (minimum 2 words). Please enter a valid 10-digit Indian mobile number starting with 6, 7, 8, or 9. Please enter your authentic institution name (generic dummy entries like 'XYZ' are not allowed).
    Join WhatsApp Channel
    ⚠️ Image size must be less than 4MB!
    Please accept the Terms & Conditions and Privacy Policy to continue.

    Thank You!

    আপোনাৰ প্ৰশ্নটো সফলতাৰে লাভ কৰা হৈছে।
    আপোনাক সংশ্লিষ্ট WhatsApp চেনেললৈ লৈ যোৱা হৈছে...

    Join WhatsApp Channel Now
    Supplementary guidance only and always follow your teachers.


    NoteSL

    FYUGP 1st to 6th Semester, along with Class 11 and Class 12 study materials, added to assist students in their exam preparation and academic studies. Access all the latest notes, solutions, and guides to boost your learning.

    notesl2026@gmail.com

    Quicks Links
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Terms & Conditions
    • Contact Us
    • Affiliate Disclosure
    Follow Us

    We share educational news & study materials on social media.


    Copyright © 2026 NoteSL. All rights reserved.


    Powered by Odoo - Create a free website