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    अध्याय 4

    सड़क की बात


    1. एक शब्द में उत्तर दो :

    (क) गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर किस आख्या से विभूषित हैं?

    उत्तर: विश्व-कवि

    (ख) रवींद्रनाथ ठाकुर जी के पिता का नाम क्या था?

    उत्तर: देवेंद्रनाथ ठाकुर

    (ग) कौन-सा काव्य-ग्रंथ रवींद्रनाथ ठाकुर जी की कीर्ति का आधार-स्तंभ है?

    उत्तर: गीतांजलि

    (घ) सड़क किसकी आखिरी घड़ियों का इंतजार कर रही है?

    उत्तर: शाप

    (ङ) सड़क किसकी तरह सब कुछ महसूस कर सकती है?

    उत्तर: अंधे

    2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो :

    (क) कवि-गुरु रवींद्रनाथ ठाकुर का जन्म कहाँ हुआ था? 

    उत्तर: कवि-गुरु रवींद्रनाथ ठाकुर का जन्म 7 मई, 1861 ई. को कोलकाता के जोरासाँको में हुआ था ।

    (ख) गुरुदेव ने कब मोहनदास करमचंद गाँधी को 'महात्मा' के रूप में संबोधित किया था?

    उत्तर: जब मोहनदास करमचंद गाँधी शांतिनिकेतन आए थे, तब गुरुदेव ने उन्हें 'महात्मा' के रूप में संबोधित किया था ।

    (ग) सड़क के पास किस कार्य के लिए फुरसत नहीं है?

    उत्तर: सड़क के पास अपने सिरहाने के पास एक छोटा-सा नीले रंग का वनफूल भी खिलाने की फुरसत नहीं है ।

    (घ) सड़क ने अपनी निद्रावस्था की तुलना किससे की है?

    उत्तर: सड़क ने अपनी निद्रावस्था की तुलना किसी के शाप से चिरनिद्रित एक सुदीर्घ अजगर से की है ।

    (ङ) सड़क अपनी कड़ी और सूखी सेज पर क्या नहीं डाल सकती?

    उत्तर: सड़क अपनी कड़ी और सूखी सेज पर एक भी मुलायम हरी घास या दूब नहीं डाल सकती ।

    3. अति संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में):

    (क) रवींद्रनाथ ठाकुर जी की प्रतिभा का परिचय किन क्षेत्रों में मिलता है?

    उत्तर: रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रतिभा बहुमुखी थी । वे एक महान कवि, गीतकार, कहानीकार, उपन्यासकार, निबंधकार, संगीतकार, कलाकार, समाज-सुधारक, शिक्षा-प्रेमी और राजनीतिज्ञ थे । उन्होंने साहित्य और कला के लगभग हर क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

    (ख) 'शांतिनिकेतन' के महत्व पर प्रकाश डालो।

    उत्तर: 'शांतिनिकेतन' बोलपुर के निकट गुरुदेव द्वारा स्थापित एक प्रमुख शैक्षिक-सांस्कृतिक केंद्र है । यह उनके सपनों का मूर्त रूप है, जो आगे चलकर 'विश्व भारती विश्वविद्यालय' के रूप में विश्वप्रसिद्ध हुआ ।

    (ग) सड़क शाप-मुक्ति की कामना क्यों कर रही है?

    उत्तर: सड़क एक सुदीर्घ अजगर की भाँति जड़ और अचेतन अवस्था में पड़ी है । वह स्वयं को स्थिर और विवश महसूस करती है, इसलिए वह इस जड़ता से मुक्ति और शाप के अंत का इंतज़ार कर रही है ।

    (घ) सुख की घर-गृहस्थी वाले व्यक्ति के पैरों की आहट सुनकर सड़क क्या समझ जाती है?

    उत्तर: सुखी व्यक्ति के पैरों की आहट से सड़क समझ जाती है कि वह हर कदम पर सुख की तस्वीर खींचता है और आशा के बीज बोता है । उसके कदमों से मानो फूल खिल उठेंगे ।

    (ङ) गृहहीन व्यक्ति के पैरों की आहट सुनने पर सड़क को क्या बोध होता है?

    उत्तर: गृहहीन व्यक्ति के कदमों में न आशा होती है, न कोई अर्थ । सड़क महसूस करती है कि उसके पैरों में न उत्साह है न दिशा; वह बिना किसी उद्देश्य के बोझिल कदमों से चलता है ।

    (च) सड़क अपने ऊपर पड़े एक चरण-चिह्न को क्यों ज्यादा देर तक नहीं देख सकती?

    उत्तर: सड़क पर लगातार नए-नए राहगीरों के पाँव पड़ते रहते हैं । नए पाँव आकर पुराने पद-चिह्नों को पोंछ जाते हैं । इस निरंतर आवागमन के कारण कोई भी निशान वहाँ अधिक देर टिक नहीं पाता ।

    (छ) बच्चों के कोमल पाँवों के स्पर्श से सड़क में कौन-से मनोभाव बनते हैं?

    उत्तर: बच्चों के कोमल स्पर्श से सड़क में कोमलता और स्नेह के भाव जागते हैं । वह स्वयं को उनके लिए कठोर अनुभव करती है और चाहती है कि वह कुसुम कली की तरह कोमल बन जाए ।

    (ज) किसलिए सड़क को न हँसी है, न रोना?

    उत्तर: सड़क के ऊपर से अमीर-गरीब और जन्म-मृत्यु सब एक समान धूल बनकर उड़ जाते हैं । वह किसी को भी अपने पास रुकने नहीं देती । इस निस्पृहता और अकेलेपन के कारण उसे न हँसी है, न रोना ।

    (झ) राहगीरों के पाँवों के शब्दों को याद रखने के संदर्भ में सड़क ने क्या कहा है?

    उत्तर: सड़क कहती है कि वह इतने अधिक चरणों की आहट सुनती है कि सबकी याद रखना उसके लिए कठिन है । समय के साथ पुरानी पद-ध्वनियाँ नीरव हो जाती हैं और वह केवल कुछ करुण स्मृतियाँ ही संजो पाती है ।

    5. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में):

    (क) सड़क का कौन-सा मनोभाव तुम्हें सर्वाधिक हृदयस्पर्शी लगा और क्यों?

    उत्तर: मुझे सड़क का बच्चों के प्रति स्नेह और उनकी कोमलता के प्रति संवेदनशीलता वाला मनोभाव सर्वाधिक हृदयस्पर्शी लगा । सड़क स्वयं को एक जड़, कठोर और शापित अजगर की तरह मानती है , लेकिन जब छोटे बच्चे अपने कोमल पाँवों से उस पर चलते हैं, तो उसका कठोर हृदय पिघल जाता है 。 वह दुखी होती है कि उसकी कठोरता बच्चों के पैरों में चुभती होगी । उस क्षण सड़क एक 'कुसुम कली' की तरह कोमल बनने की साध करती है ताकि वह बच्चों को सुख दे सके । यह भाव इसलिए मर्मस्पर्शी है क्योंकि एक निर्जीव वस्तु में भी ममता और करुणा का ऐसा मानवीय रूप लेखक ने बहुत ही जीवंत तरीके से चित्रित किया है ।

    (ख) सड़क ने अपने बारे में जो कुछ कहा है, उसे संक्षेप में प्रस्तुत करो।

    उत्तर: सड़क स्वयं को एक शापित और चिरनिद्रित सुदीर्घ अजगर की तरह बताती है जो युगों से एक ही करवट लेटी हुई है । वह बोल नहीं सकती, लेकिन अंधे की तरह सब कुछ महसूस कर सकती है । वह लाखों चरणों के स्पर्श से लोगों के सुख-दुख और उनके गंतव्य को पहचान लेती है । सड़क का कहना है कि वह किसी का लक्ष्य नहीं, बल्कि सबका उपाय मात्र है; वह सबको घर पहुँचाती है लेकिन उसका अपना कोई घर नहीं है । लोग उसे केवल विच्छेद का कारण मानते हैं और उस पर चलते हुए उसे कोसते हैं । अंत में, वह स्वयं को एक एकाकी अस्तित्व के रूप में देखती है जिस पर न हँसी का प्रभाव पड़ता है और न रोने का ।

    (ग) सड़क की बातों के जरिए मानव जीवन की जो बातें उजागर हुई हैं, उन पर संक्षिप्त प्रकाश डालो।

    उत्तर: 'सड़क की बात' एक आत्मकथात्मक निबंध है जिसके माध्यम से लेखक ने मानव जीवन की शाश्वत सच्चाइयों को उजागर किया है । सड़क मनुष्य की यात्रा, संघर्ष और उसके क्षणभंगुर अस्तित्व का प्रतीक है। जिस प्रकार सड़क पर नए पद-चिह्न पुराने निशानों को मिटा देते हैं, वैसे ही संसार में एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी का स्थान ले लेती है और पिछला सब कुछ विस्मृत हो जाता है 。 यहाँ अमीर-गरीब, जन्म-मृत्यु और सुख-दुख सब एक ही धूल के स्रोत में मिलकर उड़ जाते हैं । यह पाठ हमें सिखाता है कि जीवन निरंतर चलते रहने का नाम है, जहाँ ठहराव नहीं है। मनुष्य अक्सर अपने सहायक (सड़क) के प्रति कृतज्ञता भूल जाता है और केवल अपने गंतव्य और स्वार्थ को ही महत्व देता है I

    6. सप्रसंग व्याख्या करो:

    (क) "अपनी इस गहरी जड़ निद्रा में लाखों चरणों के स्पर्श से उनके हृदयों को पढ़ लेती हूँ।"

    उत्तर: प्रसंग: प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्यपुस्तक 'आलोक भाग 2' के अंतर्गत विश्व-कवि रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा रचित निबंध 'सड़क की बात' से ली गई है I

    व्याख्या: यहाँ लेखक ने सड़क का मानवीकरण किया है I सड़क कहती है कि यद्यपि वह एक शापित अजगर की तरह जड़ निद्रा में पड़ी रहती है, फिर भी वह पूरी तरह अचेत नहीं है I उस पर प्रतिदिन लाखों लोग चलते हैं। सड़क उन राहगीरों के पैरों की आहट और उनके स्पर्श से ही उनके मन के भावों को समझ लेती है I वह जान जाती है कि कौन व्यक्ति सुखी है, कौन दुखी है, कौन उत्सव में जा रहा है और कौन श्मशान की ओर I यह सड़क की सूक्ष्म संवेदनशीलता को दर्शाता है।

    (ख) "मुझे दिन-रात यही संताप सताता रहता है कि मुझ पर कोई तबीयत से कदम नहीं रखना चाहता।"

    उत्तर: प्रसंग: प्रस्तुत पंक्ति रवींद्रनाथ ठाकुर के प्रतीकात्मक निबंध 'सड़क की बात' से उद्धृत है I

    व्याख्या: सड़क अपना दुख व्यक्त करते हुए कहती है कि वह सबको उनके गंतव्य तक पहुँचाने का साधन है, फिर भी उसे कोई महत्व नहीं देता I लोग उस पर केवल अपनी मजबूरी में चलते हैं, कोई भी खुशी से या प्रेम से उस पर ठहरना पसंद नहीं करता I राहगीर उसे केवल थकान और विच्छेद का कारण मानते हैं I सड़क को इस बात का गहरा दुख (संताप) है कि लोग उसकी सेवा के प्रति कृतज्ञ होने के बजाय उसे कोसते हुए जल्दी से जल्दी उसे पार कर लेना चाहते हैं I

    (ग) "मैं अपने ऊपर कुछ भी पड़ा रहने नहीं देती, न हँसी, न रोना, सिर्फ मैं ही अकेली पड़ी हुई हूँ और पड़ी रहूँगी।"

    उत्तर: प्रसंग: यह पंक्ति 'सड़क की बात' नामक पाठ के उपसंहार से ली गई है, जिसके लेखक गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर हैं I

    व्याख्या: सड़क जीवन की निरंतरता और निस्पृहता का प्रतीक है। वह कहती है कि उसके ऊपर से जीवन के अनगिनत रंग गुजरते हैं—चाहे वह किसी की खुशी हो या किसी की मृत्यु का शोक I लेकिन वह किसी भी भाव को अपने पास रोककर नहीं रखती; सब कुछ धूल बनकर उड़ जाता है I वह स्वयं को इन मानवीय भावनाओं से ऊपर मानती है। अंत में केवल सड़क ही शेष बचती है, जो अपनी एकाकी अवस्था में अडिग रहती है I यह संसार की नश्वरता और समय के शाश्वत प्रवाह को प्रकट करता है।

    भाषा एवं व्याकरण ज्ञान

    1.निम्नलिखित सामासिक शब्दों का विग्रह करके समास का नाम लिखो : 

    दिन-रात, जड़निद्रा, पग-ध्वनि, चौराहा, प्रतिदिन, आजीवन, अविल, राहखर्च, पथभ्रष्ट, नीलकंठ, महात्मा, रातोंरात

    उत्तर: 

    शब्दविग्रहसमास का नाम
    दिन-रात

    दिन और रात


    द्वंद्व समास
    जड़निद्रा

    जड़ रूपी निद्रा


    कर्मधारय समास
    पग-ध्वनि

    पगों (पैरों) की ध्वनि


    तत्पुरुष समास
    चौराहाचार राहों का समूहद्विगु समास
    प्रतिदिन

    दिन-दिन (हर दिन)


    अव्ययीभाव समास
    आजीवनजीवन भरअव्ययीभाव समास
    राहखर्चराह के लिए खर्चतत्पुरुष समास
    पथभ्रष्टपथ से भ्रष्टतत्पुरुष समास (अपादान)
    नीलकंठनीला है कंठ जिसका (शिव)बहुव्रीहि समास
    महात्मा

    महान है जो आत्मा


    कर्मधारय समास
    रातोंरातरात ही रात मेंअव्ययीभाव समास

    2. निम्नांकित उपसर्गों का प्रयोग करके दो-दो शब्द बनाओ : 

    परा, अप, अधि, उप, अभि, अति, सु, अव

    उत्तर: परा: पराजय, पराभव

    अप: अपमान, अपशब्द

    अधि: अधिकार, अधिपति

    उप: उपकार, उपवन

    अभि: अभिमान, अभिनन्दन

    अति: अत्यधिक, अतिशय

    सु: सुपुत्र, सुगम

    अव: अवनति, अवतार

    3. निम्नलिखित शब्दों से उपसर्गों को अलग करो : 

    अनुभव, बेहोश, परदेश, खुशबू, दुर्दशा, दुस्साहस, निर्दय

    उत्तर: अनुभव: अनु + भव

    बेहोश: बे + होश

    परदेश: पर + देश

    खुशबू: खुश + बू

    दुर्दशा: दुर् + दशा

    दुस्साहस: दुस् + साहस

    निर्दय: निर् + दय

    4. निम्नांकित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखो : 

    सड़क, जंगल, आनंद, घर, संसार, माता, आँख, नदी

    उत्तर: सड़क: राह, मार्ग

    जंगल: वन, कानन

    आनंद: हर्ष, प्रसन्नता

    घर: गृह, सदन

    संसार: जग, दुनिया

    माता: माँ, जननी

    आँख: नयन, नेत्र

    नदी: सरिता, तटिनी

    5. विपरीतार्थक शब्द लिखो : 

    मृत्यु, अमीर, शाप, छाया, जड़, आशा, हँसी, आरंभ, कृतज्ञ, पास, निर्मल, जवाब, सूक्ष्म, धनी, आकर्षण

    उत्तर:  मृत्यु: जन्म

    अमीर: गरीब

    शाप: वरदान

    छाया: धूप

    जड़: चेतन

    आशा: निराशा

    हँसी: रोना

    आरंभ: अंत/समाप्ति

    कृतज्ञ: कृतघ्न

    पास: दूर

    निर्मल: मलिन

    जवाब: सवाल

    सूक्ष्म: स्थूल

    धनी: निर्धन

    आकर्षण: विकर्षण

    6. संधि-विच्छेद करो : 

    देहावसान, उज्ज्वल, रवींद्र, सूर्योदय, सदैव, अत्यधिक, जगन्नाथ, उच्चारण, संसार, मनोरथ, आशीर्वाद, दुस्साहस, नीरस 

    उत्तर:

    शब्दसंधि-विच्छेदसंधि का नाम
    देहावसान

    देह + अवसान

    दीर्घ स्वर संधि
    उज्ज्वल

    उत् + ज्वल

    व्यंजन संधि
    रवींद्र

    रवि + इंद्र

    दीर्घ स्वर संधि
    सूर्योदय

    सूर्य + उदय

    गुण स्वर संधि
    सदैव

    सदा + एव

    वृद्धि स्वर संधि
    अत्यधिक

    अति + अधिक

    यण स्वर संधि
    जगन्नाथ

    जगत् + नाथ

    व्यंजन संधि
    उच्चारण

    उत् + चारण

    व्यंजन संधि
    संसार

    सम् + सार

    व्यंजन संधि
    मनोरथ

    मनः + रथ

    विसर्ग संधि
    आशीर्वाद

    आशीः + वाद

    विसर्ग संधि
    दुस्साहस

    दुः + साहस

    विसर्ग संधि
    नीरस

    निः + रस

    विसर्ग संधि
















































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