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    पद्य - 1

    साखी

    अभ्यासमाला

    बोध एवं विचार

    1. सही विकल्प का चयन करो : 

    (क) महात्मा कबीरदास का जन्म हुआ था। 

    (अ) सन् 1398 में 

    (आ) सन् 1380 में 

    (इ) सन् 1370 में 

    (ई) सन् 1390 में 

    उत्तर: (अ) सन् 1398 में (संदर्भ: पाठ के अनुसार, स्वामी रामानंद के आशीर्वाद से सन् 1398 में काशी में उनका जन्म हुआ था )

    (ख) संत कबीरदास के गुरु कौन थे? 

    (अ) गोरखनाथ 

    (आ) रामानंद 

    (इ) रामानुजाचार्य 

    (ई) ज्ञानदेव 

    उत्तर: (आ) रामानंद (संदर्भ: पाठ में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि संत कबीरदास जी स्वामी रामानंद के योग्य शिष्य थे )

    (ग) कस्तूरी मृग वन-वन में क्या खोजता फिरता है? 

    (अ) कोमल घास 

    (आ) शीतल जल 

    (इ) कस्तूरी नामक सुगंधित पदार्थ 

    (ई) निर्मल हवा 

    उत्तर: (इ) कस्तूरी नामक सुगंधित पदार्थ (संदर्भ: साखी के अनुसार, कस्तूरी मृग की नाभि में ही वह सुगंधित पदार्थ होता है, जिसे वह अज्ञानतावश बाहर घास में ढूँढ़ता फिरता है )

    (घ) कबीरदास के अनुसार वह व्यक्ति पंडित है— 

    (अ) जो शास्त्रों का अध्ययन करता है। 

    (आ) जो बड़े-बड़े ग्रंथ लिखता है। 

    (इ) जो किताबें खरीदकर पुस्तकालय में रखता है।

    (ई) ‘जो प्रेम का ढाई आखर’ पढ़ता है। 

    उत्तर: (ई) ‘जो प्रेम का ढाई आखर’ पढ़ता है। (संदर्भ: कबीरजी कहते हैं— "ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय" )

    (ङ) कवि के अनुसार हमें कल का काम कब करना चाहिए? 

    (अ) आज 

    (आ) कल 

    (इ) परसों 

    (ई) नर्सों

    उत्तर: (अ) आज (संदर्भ: साखी की पंक्ति है— "काल करे सो आज कर, आज करे सो अब" )

    2. एक शब्द में उत्तर दो :

    (क) श्रीमंत शंकरदेव ने अपने किस ग्रंथ में कबीरदास जी का उल्लेख किया है?

    उत्तर: कीर्तन घोषा

    (ख) महात्मा कबीरदास का देहावसान कब हुआ था?

    उत्तर: सन् 1518 में

    (ग) कवि के अनुसार प्रेमविहीन शरीर कैसा होता है?

    उत्तर: मसान (श्मशान) के समान

    (घ) कबीरदास जी ने गुरु को क्या कहा है?

    उत्तर: कुम्हार

    (ङ) महात्मा कबीरदास की रचनाएँ किस नाम से प्रसिद्ध हुई?

    उत्तर: बीजक

    3. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो :

    (क) कबीरदास के पालक पिता-माता कौन थे?

    उत्तर: कबीरदास के पालक पिता-माता नीरू और नीमा नामक मुसलमान जुलाहे दंपति थे ।

    (ख) ‘कबीर’ शब्द का अर्थ क्या है?

    उत्तर: ‘कबीर’ शब्द का अर्थ है— बड़ा, महान या श्रेष्ठ ।

    (ग) ‘साखी’ शब्द किस संस्कृत शब्द से विकसित है?

    उत्तर: ‘साखी’ शब्द मूल संस्कृत शब्द ‘साक्षी’ से विकसित है ।

    (घ) साधु की कौन-सी बात नहीं पूछी जानी चाहिए?

    उत्तर: कबीरदास जी के अनुसार साधु की जाति नहीं पूछी जानी चाहिए, बल्कि उनसे ज्ञान की बातें पूछनी चाहिए ।

    (ङ) डूबने से डरने वाला व्यक्ति कहाँ बैठा रहता है?

    उत्तर: डूबने से डरने वाला व्यक्ति (बौरा) किनारे पर बैठा रहता है और वह कुछ हासिल नहीं कर पाता ।

    4. अति संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में) :

    (क) कबीरदास जी की कविताओं की लोकप्रियता पर प्रकाश डालो।

    उत्तर: कबीरदास की कविताएँ आम जनता की सरल भाषा में होने के कारण अत्यंत लोकप्रिय थीं । असम के श्रीमंत शंकरदेव ने भी उल्लेख किया है कि वाराणसी और उड़ीसा के साधु-संत उनके पदों को गाते थे ।

    (ख) कबीरदास जी के आराध्य कैसे थे?

    उत्तर: कबीरदास जी के आराध्य निर्गुण-निराकार 'राम' थे । वे मानते थे कि उनके प्रभु संसार के कण-कण और प्रत्येक अणु-परमाणु में बसने वाले हैं, जिन्हें मंदिर-मस्जिद के बजाय भीतर खोजना चाहिए ।

    (ग) कबीरदास जी की काव्य भाषा किन गुणों से युक्त है?

    उत्तर: कबीर की भाषा 'सधुक्कड़ी' या 'पंचमेल खिचड़ी' कहलाती है, जिसमें तत्कालीन हिंदुस्तानी के शब्द शामिल हैं । उनकी भाषा सरल, सुबोध, स्वाभाविक अलंकारों से सजी और जनता के लिए अत्यंत सुलभ है ।

    (घ) ‘तेरा साईं तुझ में, ज्यों पुहुपन में बास’ का आशय क्या है?

    उत्तर: इसका आशय यह है कि ईश्वर प्रत्येक मनुष्य के भीतर उसी प्रकार विद्यमान है, जैसे फूलों में सुगंध रमी होती है । अज्ञानतावश मनुष्य उन्हें बाहर ढूँढ़ता है, जबकि वे अंतरात्मा में ही निवास करते हैं ।

    (ङ) ‘सत गुरु’ की महिमा के बारे में कवि ने क्या कहा है?

    उत्तर: कवि के अनुसार सद्गुरु की महिमा अनंत है क्योंकि उन्होंने शिष्य पर अनगिनत उपकार किए हैं । गुरु ने ही शिष्य की आध्यात्मिक आँखें खोलकर उसे अनंत परमात्मा के दर्शन कराए हैं ।

    (च) ‘अंतर हाथ सहार दे, बाहर बाहै चोट’ का तात्पर्य बताओ।

    उत्तर: इसका तात्पर्य यह है कि गुरु कुम्हार की तरह कठोर अनुशासन (चोट) देकर शिष्य की बुराइयाँ दूर करते हैं, परंतु भीतर से वे सहानुभूति का सहारा देकर शिष्य के व्यक्तित्व को सहारा भी देते हैं ।

    5. संक्षेप में उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में) :

    (क) बुराई खोजने के संदर्भ में कवि ने क्या कहा है?

    उत्तर: बुराई खोजने के संदर्भ में कबीरदास जी कहते हैं कि मनुष्य का स्वभाव दूसरों में कमियाँ ढूँढ़ने का होता है । कवि ने जब स्वयं दूसरों में बुराई खोजने का प्रयास किया, तो उन्हें कोई भी बुरा व्यक्ति नहीं मिला । परंतु जब उन्होंने अपने अंतर्मन में झाँककर आत्म-निरीक्षण किया, तो उन्हें ज्ञात हुआ कि उनसे बुरा और कोई नहीं है । अतः कबीरदास जी संदेश देते हैं कि दूसरों की आलोचना करने से पूर्व व्यक्ति को अपनी बुराइयाँ सुधारनी चाहिए ।

    (ख) कबीर दास जी ने किसलिए मन का मनका फेरने का उपदेश दिया है?

    उत्तर: कबीरदास जी के अनुसार केवल हाथ में माला फेरने से या बाह्य आडंबरों से ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती । यदि व्यक्ति का मन चंचल है और उसमें कुविचार भरे हैं, तो युगों तक माला फेरना व्यर्थ है । इसीलिए उन्होंने 'मन का मनका' (हृदय की शुद्धि) फेरने का उपदेश दिया है । उनका मानना है कि वास्तविक भक्ति के लिए मानसिक शुद्धि और सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करना अनिवार्य है ।

    (ग) गुरु शिष्य को किस प्रकार गढ़ते हैं?

    उत्तर: कबीरदास जी ने गुरु की तुलना कुम्हार से और शिष्य की तुलना मिट्टी के कच्चे घड़े से की है । जिस प्रकार कुम्हार घड़े को सुंदर आकार देने के लिए भीतर से हाथ का सहारा देता है और बाहर से चोट मारता है, ठीक उसी प्रकार गुरु भी शिष्य के व्यक्तित्व को गढ़ते हैं । वे शिष्य की कमियों और खोट को दूर करने के लिए बाहर से कठोर अनुशासन रखते हैं, परंतु भीतर से स्नेह और मार्गदर्शन का सहारा प्रदान करते हैं ।

    (घ) कोरे पुस्तकीय ज्ञान की निरर्थकता पर कबीरदास जी ने किस प्रकार प्रकाश डाला है?

    उत्तर: कबीरदास जी का मानना है कि केवल बड़ी-बड़ी पुस्तकें या शास्त्र पढ़ने से कोई व्यक्ति विद्वान या 'पंडित' नहीं बन जाता । कोरा पुस्तकीय ज्ञान मनुष्य को अहंकारी बना सकता है, परंतु उसे सत्य का साक्षात्कार नहीं कराता । कबीर के अनुसार, यदि किसी ने प्रेम और मानवता का 'ढाई अक्षर' पढ़ लिया और उसे जीवन में उतार लिया, वही वास्तव में सच्चा ज्ञानी है । वे व्यावहारिक ज्ञान और प्रेम-भक्ति को पुस्तकीय ज्ञान से श्रेष्ठ मानते हैं ।

    6. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में) :

    (क) संत कबीरदास की जीवन-गाथा पर प्रकाश डालो।

    उत्तर: महात्मा कबीरदास की जीवन-गाथा अत्यंत रोचक और प्रेरणादायी है। उनका जन्म सन् 1398 में काशी में एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से हुआ था, जिन्होंने लोक-लज्जा के भय से उन्हें लहरतारा तालाब के किनारे छोड़ दिया था । वहाँ से गुजरते हुए नीरू और नीमा नामक एक निसंतान मुसलमान जुलाहे दंपति को वह बालक मिला, जिसे उन्होंने खुदा का आशीर्वाद मानकर गोद ले लिया और उनका नाम 'कबीर' रखा । कबीर का अर्थ है— बड़ा या महान । उन्होंने अपने पालक माता-पिता के जुलाहे के व्यवसाय को ही अपनी आजीविका के रूप में अपनाया । वे स्वामी रामानंद के योग्य शिष्य थे और उन्होंने गृहस्थ जीवन जीते हुए भी उच्च कोटि की आध्यात्मिक साधना की । कबीरदास जी ने अपना पूरा जीवन समाज सुधार और भक्ति में समर्पित कर दिया और अंततः सन् 1518 में मगहर में उनका देहावसान हुआ ।

    (ख) भक्त कवि कबीरदास जी का साहित्यिक परिचय दो।

    उत्तर: कबीरदास जी हिंदी साहित्य के भक्ति काल के निर्गुण ज्ञानमार्गी शाखा के सर्वोपरि कवि हैं। यद्यपि वे विधिवत् शिक्षित नहीं थे, परंतु साधु-संगति और अनुभव की 'खुली पुस्तक' से उन्होंने अगाध ज्ञान प्राप्त किया था । उनकी रचनाएँ 'बीजक' नाम से प्रसिद्ध हैं, जिसके तीन मुख्य भाग हैं— साखी, सबद और रमैनी । कबीर की भाषा को विद्वानों ने 'सधुक्कड़ी' या 'पंचमेल खिचड़ी' कहा है क्योंकि इसमें तत्कालीन हिंदुस्तानी और लोकभाषा के शब्दों का सुंदर मिश्रण है । उनकी कविताओं में भक्ति भाव के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान, मानवतावादी दृष्टि और सामाजिक कुरीतियों पर कड़ा प्रहार मिलता है । उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से आत्मा, परमात्मा, माया और गुरु की महिमा जैसे गंभीर विषयों को अत्यंत सरल और सुबोध रूप में जनता के सामने प्रस्तुत किया है । उनकी वाणी आज भी उतनी ही प्रासंगिक और लोकप्रिय है ।

    भाषा एवं व्याकरण-ज्ञान

    1. निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप बताओ :

    मिरग, पुहुप, सिष, आखर, मसान, परलय, उपगार, तीरथ

    उत्तर:

    तद्भव/देशज शब्दतत्सम रूप
    मिरग

    मृग

    पुहुप

    पुष्प

    सिष

    शिष्य

    आखर

    अक्षर

    मसान

    श्मशान

    परलय

    प्रलय

    उपगार

    उपकार

    तीरथतीर्थ

    2. वाक्यों में प्रयोग करके निम्नांकित जोड़ों के अर्थ का अंतर स्पष्ट करो :

    मनका—मन का, करका—कर का, नलकी—नल की, पीलिया—पी लिया, तुम्हारे—तुम हारे, नदी—न दी

    उत्तर: 

    • मनका (माला का दाना): वह अपने हाथ में माला का मनका फेर रहा है ।

    • मन का (हृदय का): शांत रहने के लिए मन का साफ होना जरूरी है ।

    • करका (हाथ का): कबीर कहते हैं कि हाथ का अर्थात् करका मनका छोड़ दो ।

    • कर का (टैक्स का): नागरिक को समय पर अपने कर का भुगतान करना चाहिए।

    • नलकी (एक छोटी नली): साइकिल के टायर की नलकी खराब हो गई है।

    • नल की (नल संबंधी): आज हमारे घर के नल की मरम्मत होनी है।

    • पीलिया (एक बीमारी): उसे पीलिया हो गया है, इसलिए वह आराम कर रहा है।

    • पी लिया (पानी आदि ग्रहण करना): प्यास लगने पर मैंने शीतल जल पी लिया।

    • तुम्हारे (सम्बन्धवाचक सर्वनाम): तुम्हारे पास हिंदी की कौन सी पुस्तक है?

    • तुम हारे (पराजय): खेल के मैदान में तुम हारे पर तुमने हिम्मत नहीं छोड़ी।

    • नदी (सरिता): गंगा भारत की एक पवित्र नदी है।

    • न दी (नहीं देना): उसने बार-बार मांगने पर भी मुझे अपनी कलम न दी।

    3. निम्नलिखित शब्दों के लिंग निर्धारित करो :

    महिमा, चोट, लोचन, तलवार, ज्ञान, घट, साँस, प्रेम

    उत्तर: हिमा: स्त्रीलिंग (जैसे: गुरु की महिमा अनंत है )

    चोट: स्त्रीलिंग (जैसे: बाहर बाहै चोट )

    लोचन: पुल्लिंग (जैसे: लोचन अनँत उघाड़िया )

    तलवार: स्त्रीलिंग (जैसे: मोल करो तलवार का )

    ज्ञान: पुल्लिंग (जैसे: पूछि लीजिए ज्ञान )

    घट: पुल्लिंग (जैसे: जा घट प्रेम न संचरै )

    साँस: स्त्रीलिंग (जैसे: साँस लेत बिनु प्रान )

    प्रेम: पुल्लिंग (जैसे: ढाई आखर प्रेम का )

    4. निम्नांकित शब्द-समूहों के लिए एक-एक शब्द लिखो :

    (क) मिट्टी के बर्तन बनाने वाला व्यक्ति

    उत्तर: कुम्हार

    (ख) जो जल में डुबकी लगाता हो

    उत्तर: गोताखोर (साखी के संदर्भ में 'गहरे पानी पैठ' )

    (ग) जो लोहे के औजार बनाता है

    उत्तर: लोहार

    (घ) सोने के गहने बनाने वाला कारीगर

    उत्तर: सुनार

    (ङ) विविध विषयों के गंभीर ज्ञान रखने वाला व्यक्ति

    उत्तर: पंडित/ विद्वान

    5. निम्नांकित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखो :

    साईं, पानी, पवन, फूल, सूर्य, गगन, धरती

    उत्तर: 

    शब्दपर्यायवाची शब्द 1पर्यायवाची शब्द 2
    साईं

    ईश्वर

    प्रभु

    पानी

    जल

    नीर
    पवनवायु

    हवा

    फूल

    पुष्प

    कुसुम
    सूर्यरविदिनकर
    गगनआकाशनभ
    धरतीपृथ्वीधरा














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