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    पद्य - 10

    नर हो, न निराश करो मन को


    अभ्यासमाला

    बोध एवं विचार

    ( अ ) सही विकल्प का चयन करो :

    1. ​कवि ने हमें प्रेरणा दी है - 

    (क) कर्म की 

    (ख) आशा की 

    (ग) गौरव की 

    (घ) साधन की

    उत्तर: (क) कर्म की(तर्क: कविता में कवि ने मनुष्य को 'कर्मठता' का संदेश दिया है और 'कुछ काम करो' कहकर कर्म करने की प्रेरणा दी है।)

    2. ​कवि के अनुसार मनुष्य को अमरत्व प्राप्त हो सकता है - 

    (क) अपने नाम से 

    (ख) धन से 

    (ग) भाग्य से 

    (घ) अपने व्यक्तित्व से

    उत्तर: (घ) अपने व्यक्तित्व से(तर्क: पाठ के अनुसार, जब मनुष्य अपने महत्व और व्यक्तित्व को पहचानता है, तभी उसे गौरव और अमरत्व प्राप्त होता है।)

    3. ​कवि के अनुसार 'न निराश करो मन को' का आशय है - 

    (क) सफलता प्राप्त करने के लिए आशावान होना। 

    (ख) मन में निराशा तो हमेशा बनी रहती है। 

    (ग) मनुष्य अपने प्रयत्न से असफलता को भी सफलता में बदल सकता है। 

    (घ) आदमी को अपने गौरव का ध्यान हमेशा रहता है।

    उत्तर: (ग) मनुष्य अपने प्रयत्न से असफलता को भी सफलता में बदल सकता है।(तर्क: इस पंक्ति का गहरा अर्थ यह है कि मनुष्य को हार मानकर नहीं बैठना चाहिए, बल्कि अपने पुरुषार्थ और प्रयासों से विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल बना लेना चाहिए।)

    ( आ ) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखो ( लगभग 50 शब्दों में ) :

    1. तन को उपयुक्त बनाए रखने के क्या उपाय है? 

    उत्तर:कवि मैथिलीशरण गुप्त जी के अनुसार, ईश्वर ने मनुष्य को यह शरीर किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए दिया है। तन को उपयुक्त बनाए रखने का सबसे प्रमुख उपाय 'कर्म' करना है। मनुष्य को चाहिए कि वह आलस्य का त्याग कर अपने शरीर का सदुपयोग सार्थक कार्यों में करे ताकि उसका जीवन व्यर्थ न जाए। जब मनुष्य सक्रिय रहकर सुयोग का लाभ उठाता है और सन्मार्ग पर चलता है, तभी उसका शरीर वास्तव में उपयुक्त बना रहता है।

    2. कवि के अनुसार जग को निरा सपना क्यों नहीं समझना चाहिए? 

    उत्तर:कवि कहते हैं कि इस संसार को केवल एक 'निरा सपना' या काल्पनिक भ्रम नहीं समझना चाहिए क्योंकि यह कर्मभूमि है I यदि हम इसे केवल सपना मान लेंगे, तो हम हाथ पर हाथ धरकर बैठ जाएंगे और कुछ भी हासिल नहीं कर पाएंगे। कवि के अनुसार, वास्तविकता का सामना करते हुए हमें अपना मार्ग स्वयं प्रशस्त करना चाहिए। ईश्वर ने हमें सभी आवश्यक तत्त्व और शक्तियाँ प्रदान की हैं, जिनका उपयोग कर हमें संसार में अपनी पहचान बनानी चाहिए।

    3. अमरत्व-विधान से कवि का क्या तात्पर्य है? 

    उत्तर:'अमरत्व-विधान' से कवि का तात्पर्य ऐसे महान और श्रेष्ठ कार्य करने से है, जिससे मनुष्य मृत्यु के पश्चात भी लोगों के दिलों में जीवित रहे। कवि के अनुसार, मनुष्य को अपने व्यक्तित्व और स्वत्त्व (अपनी पहचान) को पहचानना चाहिए। जब व्यक्ति अपने आत्म-गौरव को समझकर मानवता के कल्याण के लिए कर्म करता है, तो वह अमरत्व प्राप्त कर लेता है। इसका अर्थ केवल भौतिक रूप से जीवित रहना नहीं, बल्कि अपने यश और कीर्ति से सदैव के लिए अमर हो जाना है।

    4. अपने गौरव का किस प्रकार ध्यान रखना चाहिए? 

    उत्तर:मनुष्य को सदैव इस बात का ज्ञान होना चाहिए कि उसका अस्तित्व तुच्छ नहीं है। 'हम भी कुछ हैं'—यह आत्म-सम्मान का भाव हमेशा मन में बना रहना चाहिए। कवि का मानना है कि चाहे जीवन में सब कुछ नष्ट हो जाए, लेकिन मनुष्य को अपने मान-सम्मान और स्वाभिमान का त्याग कभी नहीं करना चाहिए। अपने गौरव की रक्षा के लिए निरंतर कर्मशील रहना और कठिन परिस्थितियों में भी अपने साधनों या संकल्पों को न छोड़ना ही गौरव का असली ध्यान रखना है I

    5. कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखो।

    उत्तर: प्रस्तुत कविता का मुख्य प्रतिपाद्य मनुष्य को कर्मठता और आत्मविश्वास का संदेश देना है I राष्ट्रकवि गुप्त जी बताते हैं कि मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है, इसलिए उसे निराश होकर हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए। कविता हमें सिखाती है कि अनुकूल अवसर का लाभ उठाकर हमें अपना मार्ग स्वयं बनाना चाहिए। आत्म-गौरव को पहचानना, स्वाभिमान से जीना और निरंतर कार्य करते हुए जग में अपना नाम रोशन करना ही इस कविता का मूल उद्देश्य है।

    ( इ ) सप्रसंग व्याख्या करो ( लगभग 100 शब्दों में ) :

    1. "सँभलो कि सु-योग न जाए चला,

     कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला ?"

    उत्तर: 

    संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'आलोक, भाग-1' में संकलित कविता 'नर हो, न निराश करो मन को' से ली गई हैं। इसके रचयिता राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी हैं।

    प्रसंग: इन पंक्तियों में कवि मनुष्य को समय के महत्व और कर्मठता के प्रति सचेत कर रहे हैं।

    व्याख्या: कवि कहते हैं कि हे मनुष्य! तुम्हें सावधान हो जाना चाहिए ताकि उन्नति का यह सुंदर अवसर (सु-योग) तुम्हारे हाथ से निकल न जाए। संसार में किया गया श्रेष्ठ प्रयास या अच्छा उपाय कभी भी व्यर्थ नहीं जाता है। यदि तुम सही समय पर सही कदम उठाओगे, तो तुम्हें सफलता अवश्य मिलेगी। कवि का मानना है कि निराश होकर बैठने के बजाय मनुष्य को सक्रिय होकर अवसर का लाभ उठाना चाहिए। कर्मशील व्यक्ति के लिए कोई भी सुयोग बेकार नहीं जाता, बशर्ते वह पूरे मन से प्रयास करे।

    2. "जब प्राप्त तुम्हें सब तत्व यहाँ, 

    फिर जा सकता वह सत्व कहाँ ?"

    उत्तर: 

    संदर्भ: ये पंक्तियाँ मैथिलीशरण गुप्त जी द्वारा रचित प्रसिद्ध कविता 'नर हो, न निराश करो मन को' से उद्धृत हैं।

    प्रसंग: यहाँ कवि मनुष्य को उसकी आंतरिक शक्तियों और ईश्वर द्वारा प्रदत्त संसाधनों का बोध करा रहे हैं।

    व्याख्या: कवि प्रश्न करते हैं कि जब ईश्वर ने इस संसार में तुम्हें सफलता प्राप्त करने के लिए सभी आवश्यक साधन और तत्व प्रदान किए हैं, तो फिर वह सार या सफलता (सत्व) तुमसे दूर कैसे रह सकती है? तात्पर्य यह है कि मनुष्य के पास बुद्धि, शरीर और प्राकृतिक संसाधन सब कुछ उपलब्ध हैं। यदि वह अपनी शक्तियों और अपने गौरव को पहचान ले, तो उसे कुछ भी प्राप्त करना असंभव नहीं है। कवि मनुष्य को प्रेरित करते हैं कि वह अपने 'स्वत्त्व' (अस्तित्व) को पहचाने और अमरत्व प्राप्त करने के मार्ग पर अग्रसर हो। जब आधार मौजूद है, तो परिणाम अवश्य सकारात्मक होगा।

    भाषा एवं व्याकरण ज्ञान

    1. ​कविता के आधार पर इन शब्दों के तुकांत शब्द लिखो :

     अर्थ, तन, चला, सपना, तत्व, यहाँ, ज्ञान, मान

    उत्तर:

    शब्दतुकांत शब्द (कविता के आधार पर)
    अर्थ

    व्यर्थ

    तन

    मन

    चलाभला
    सपनाअपना
    तत्वसत्व
    यहाँकहाँ
    ज्ञानध्यान
    मानगान

    2. ​इन शब्दों में से उपसर्ग अलग करो : 

    व्यर्थ, उपयुक्त, सु-योग, सदुपाय, प्रशस्त, अवलम्बन, निराश

    उत्तर: 

    व्यर्थ: वि + अर्थ

    उपयुक्त: उप + युक्त

    सु-योग: सु + योग

    सदुपाय: सत् + उपाय

    प्रशस्त: प्र + शस्त

    अवलम्बन: अव + लम्बन

    निराश: निर् + आश

    3. ​इन शब्दों के विलोम शब्द लिखो : 

    निज, उपयुक्त, निराश, अपना, सुधा, ज्ञान, मान, जन्म

    उत्तर: 

    शब्दविलोम शब्द
    निज

    पर

    उपयुक्त

    अनुपयुक्त

    निराश

    आशावान

    अपना

    पराया

    सुधा

    विष

    ज्ञान

    अज्ञान

    मान

    अपमान

    जन्म

    मृत्यु

    4. ​इन शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखो : 

    नर, जग, अर्थ, पथ, अखिलेश्वर

    उत्तर: इन शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची (Synonyms) शब्द लिखो:

    • नर: मनुष्य, मानव, मनुज


    • जग: संसार, दुनिया, विश्व


    • अर्थ: धन, मतलब, प्रयोजन


    • पथ: रास्ता, मार्ग, राह


    • अखिलेश्वर: ईश्वर, परमात्मा, भगवान

    5. ​‘अमरत्व’ शब्द में ‘त्व’ प्रत्यय लगा है। भाववाचक ‘त्व’ प्रत्यय खासकर भाववाचक संज्ञा का द्योतक है। ‘त्व’ प्रत्ययवाले किन्हीं दस शब्द लिखो।

    उत्तर: अमरत्व, मनुष्यत्व, व्यक्तित्व ,महत्व, कवित्व ,देवत्व ,नारीत्व ,बंधुत्व ,कर्तृत्व, प्रभुत्व





























































































































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