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    पद्य - 8

    कृष्ण-महिमा


    अभ्यासमाला

    बोध एवं विचार

    1. सही विकल्प का चयन करो : 

    (क) रसखान कैसे कवि थे ? 

    (1) कृष्णभक्त 

    (2) रामभक्त 

    (3) सूफी 

    (4) संत 

    उत्तर: (1) कृष्णभक्त

    (ख) कवि रसखान की प्रामाणिक रचनाओं की संख्या है - 

    (1) तीन 

    (2) दो

    (3) चार 

    (4) पाँच 

    उत्तर: (2) दो ('सुजान रसखान' और 'प्रेमवाटिका')

    (ग) पत्थर बनकर कवि रसखान कहाँ रहना चाहते हैं ? 

    (1) हिमालय पर्वत पर 

    (2) गोवर्धन पर्वत पर 

    (3) विंध्य पर्वत पर 

    (4) नीलगिरि पर 

    उत्तर: (2) गोवर्धन पर्वत पर

    (घ) बालक कृष्ण के हाथ से कौआ क्या लेकर भागा ? 

    (1) सूखी रोटी 

    (2) दाल-रोटी 

    (3) पावरोटी 

    (4) माखन-रोटी

    उत्तर: (4) माखन-रोटी

    2. एक शब्द में उत्तर दो :

    (क) रसखान ने किनसे भक्ति की दीक्षा ग्रहण की थी?

    उत्तर: गोस्वामी विट्ठलनाथ जी।

    (ख) ‘प्रेमवाटिका’ के रचयिता कौन हैं?

    उत्तर: रसखान।

    (ग) रसखान की काव्य-भाषा क्या है?

    उत्तर: ब्रजभाषा।

    (घ) आराध्य कृष्ण का वेष धारण करते हुए कवि अधरों पर क्या धारण करना नहीं चाहते?

    उत्तर: मुरली (बाँसुरी)।

    (ङ) किनकी गाय चराकर कवि रसखान सब प्रकार के सुख भुलाना चाहते हैं?

    उत्तर: नंद की गाय।

    3. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो :

    (क) कवि रसखान कैसे इंसान थे?

    उत्तर: कवि रसखान एक अत्यंत भावुक, उदार हृदय और कृष्ण-भक्ति में लीन रहने वाले तन्मय इंसान थे।

    (ख) कवि रसखान किस स्थिति में गोपियों के कृष्ण-प्रेम से अभिभूत हुए थे?

    उत्तर: श्रीमद्भागवत का फारसी अनुवाद पढ़ते समय गोपियों के अनन्य कृष्ण-प्रेम को देखकर रसखान अत्यंत अभिभूत हुए थे।

    (ग) कवि रसखान ने अपनी रचनाओं में किन छंदों का अधिक प्रयोग किया है?

    उत्तर: कवि रसखान ने अपनी रचनाओं में 'सवैया' और 'कवित्त' छंदों का सर्वाधिक प्रयोग किया है।

    (घ) मनुष्य के रूप में कवि रसखान कहाँ बसना चाहते हैं?

    उत्तर: मनुष्य के रूप में कवि रसखान ब्रज भूमि के गोकुल गाँव के ग्वालों के बीच बसना चाहते हैं।

    (ङ) किन वस्तुओं पर कवि रसखान तीनों लोकों का राज न्योछावर करने को प्रस्तुत हैं?

    उत्तर: कवि रसखान कृष्ण की लाठी (लकुटी) और उनके कंबल (कामरिया) पर तीनों लोकों का राज न्योछावर करने को प्रस्तुत हैं।

    4. अति संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में) :

    (क) कवि का नाम ‘रसखान’ किस प्रकार पूर्णतः सार्थक बन पड़ा है ? 

    उत्तर: 'रसखान' का अर्थ है 'रस की खान'। कवि की रचनाएँ कृष्ण प्रेम और भक्ति के रस से इतनी सराबोर हैं कि पाठक उनमें डूब जाता है। उनकी कविता की मिठास और आनंदमयी अभिव्यक्ति उनके इस नाम को पूरी तरह सार्थक करती है।

    (ख) ‘जो खग हौं तो बसेरो करौं, मिलि कालिंदी-कुल-कदंब की डारन’ – का आशय क्या है ? 

    उत्तर: इसका आशय यह है कि कवि अगले जन्म में पक्षी बनकर यमुना (कालिंदी) के किनारे स्थित कदंब के पेड़ों की डालियों पर निवास करना चाहते हैं। वे हर हाल में कृष्ण की लीला-स्थली के समीप रहकर उनका सानिध्य पाना चाहते हैं।

    (ग) ‘वा छबि कों रसखानि बिलोकत, वारत काम कलानिधि कोटी’ – का तात्पर्य बताओ। 

    उत्तर: इस पंक्ति का तात्पर्य है कि बालक कृष्ण के अत्यंत मनमोहक रूप और उनकी सुंदरता को देखकर रसखान भाव-विभोर हो जाते हैं। कृष्ण की उस अद्भुत छवि पर वे करोड़ों कामदेवों और कलाओं के सौंदर्य को भी न्योछावर करने को तैयार हैं।

    (घ) ‘‘भावतो वोहि मेरे ‘रसखानि’, सो तेरे कहे सब स्वांग भरौंगी’’ – का भाव स्पष्ट करो। 

    उत्तर: इसका भाव यह है कि कृष्ण गोपी को इतने प्रिय हैं कि वह अपनी सखी के कहने पर कृष्ण का रूप धारण करने को तैयार है। वह कहती है कि कृष्ण के प्रेम के वश में होकर वह उनके जैसा हर वेष धारण कर लेगी।

    5. संक्षेप में उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में) :

    (क) कवि रसखान अपने आराध्य का सान्निध्य किन रूपों में प्राप्त करना चाहते हैं ? 

    उत्तर: कवि रसखान अगले जन्म में हर स्थिति में अपने आराध्य श्री कृष्ण का सान्निध्य (निकटता) पाना चाहते हैं। वे कहते हैं कि यदि वे मनुष्य बनें तो गोकुल के ग्वालों के बीच रहें, पशु बनें तो नंद की गायों के बीच चरें, पत्थर बनें तो उसी गोवर्धन पर्वत का हिस्सा बनें जिसे कृष्ण ने उठाया था, और यदि पक्षी बनें तो यमुना किनारे कदंब की डालों पर बसेरा करें।

    (ख) अपने उपास्य से जुड़े किन उपकरणों पर क्या-क्या न्योछावर करने की बात कवि ने की है ? 

    उत्तर: कवि रसखान अपने उपास्य श्री कृष्ण से जुड़ी साधारण वस्तुओं को संसार के समस्त सुखों से बड़ा मानते हैं। वे कृष्ण की लाठी (लकुटी) और कंबल (कामरिया) पर तीनों लोकों का राज न्योछावर करने को तैयार हैं। साथ ही, वे नंद की गायों को चराने के सुख के बदले आठों सिद्धियों और नौ निधियों के सुख को भी तुच्छ मानकर उन्हें त्यागने की इच्छा व्यक्त करते हैं।

    (ग) कवि ने श्रीकृष्ण के बाल-रूप की माधुरी का वर्णन किस रूप में किया है ? 

    उत्तर: रसखान ने कृष्ण के बाल-रूप का अत्यंत मनमोहक वर्णन किया है। वे कहते हैं कि धूल से सने हुए बालक कृष्ण के सिर पर सुंदर चोटी सुशोभित है। वे आंगन में खेलते और खाते हुए घूम रहे हैं और उनके पैरों में पैंजनी बज रही है। कृष्ण की इस सुंदरता और उनके हाथ से कौवे द्वारा माखन-रोटी छीनकर ले जाने वाली छवि पर करोड़ों कामदेवों का सौंदर्य भी फीका है।

    (घ) कवि ने अपने आराध्य की तरह वेश धारण करने की इच्छा व्यक्त करते हुए क्या कहा है ? 

    उत्तर: कवि ने एक गोपी के माध्यम से कृष्ण का वेश धारण करने की इच्छा व्यक्त की है। गोपी कहती है कि वह कृष्ण की तरह सिर पर मोरपंख का मुकुट, गले में गुंजों की माला और शरीर पर पीले वस्त्र धारण कर लाठी लेकर ग्वालों के संग घूमेगी। वह कृष्ण के प्रति अपने प्रेम के कारण उनके सभी रूप धारण (स्वांग) करने को तैयार है, परंतु वह उस मुरली को अपने होंठों पर कभी नहीं रखेगी।

    6. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में) :

    (क) कवि रसखान का साहित्यिक परिचय प्रस्तुत करो। 

    उत्तर: कृष्णभक्त कवि रसखान का जन्म संवत् 1590 के आसपास दिल्ली में हुआ था। उनका वास्तविक नाम सैयद इब्राहिम था। वे गोस्वामी विट्ठलनाथ जी के शिष्य थे और उन्होंने अपना पूरा जीवन ब्रजभूमि में कृष्ण-भक्ति के लिए समर्पित कर दिया था। रसखान की रचनाओं में प्रेम और भक्ति का अद्भुत संगम मिलता है। उनकी दो प्रमुख प्रामाणिक रचनाएँ उपलब्ध हैं— 'सुजान रसखान' और 'प्रेमवाटिका'। रसखान ने अपनी कविताओं में 'सवैया' और 'कवित्त' छंदों का उत्कृष्ट प्रयोग किया है। उनकी भाषा शुद्ध और सरस ब्रजभाषा है, जिसमें अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग मिलता है। उनकी रचनाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उनमें तन्मयता, भावुकता और रस की प्रधानता है, जिसके कारण उनका नाम 'रसखान' (रस की खान) पूर्णतः सार्थक सिद्ध होता है।

    (ख) कवि रसखान की कृष्ण-भक्ति पर प्रकाश डालो। 

    उत्तर: रसखान की कृष्ण-भक्ति अनन्य और निश्छल है। वे केवल कृष्ण के रूप के ही नहीं, बल्कि उनकी लीला-स्थली ब्रजभूमि के भी उपासक हैं। उनकी भक्ति सगुण रूप पर आधारित है, जहाँ वे कृष्ण की लाठी, कंबल, उनके बाल-रूप और उनकी गायों तक से गहरा लगाव रखते हैं। रसखान की भक्ति की विशेषता यह है कि वे मोक्ष की इच्छा नहीं रखते, बल्कि वे अगले जन्म में भी किसी न किसी रूप में ब्रज में ही निवास करना चाहते हैं। वे कृष्ण की भक्ति के लिए संसार के आठों सिद्धियों, नौ निधियों और स्वर्ग के सुखों को भी त्यागने के लिए तत्पर हैं। उनकी भक्ति में सांप्रदायिक संकीर्णता का अभाव है; एक मुस्लिम होते हुए भी उनकी कृष्ण के प्रति श्रद्धा भारतीय साहित्य में सांप्रदायिक सद्भाव का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करती है।

    (ग) पठित छंदों के जरिए कवि रसखान ने क्या-क्या कहना चाहा है ? 

    उत्तर: पठित छंदों (सवैयों) के माध्यम से रसखान ने कृष्ण और ब्रजभूमि के प्रति अपने अगाध प्रेम और समर्पण को अभिव्यक्त किया है। पहले छंद में वे स्पष्ट करते हैं कि चाहे वे मनुष्य बनें, पशु, पत्थर या पक्षी, हर हाल में वे ब्रजभूमि का हिस्सा बनकर कृष्ण के सान्निध्य में रहना चाहते हैं। दूसरे छंद में वे कृष्ण की वस्तुओं (लकुटी और कामरिया) को भौतिक ऐश्वर्य से श्रेष्ठ बताते हैं। तीसरे छंद में कृष्ण के बाल-रूप की मधुरता और उनके साथ जुड़ी बाल-लीलाओं का सजीव चित्रण किया गया है, जहाँ कौआ उनके हाथ से माखन-रोटी छीन ले जाता है। अंतिम छंद में वे गोपियों के निस्वार्थ प्रेम का वर्णन करते हैं, जो कृष्ण के लिए कोई भी वेष धारण कर सकती हैं, पर उनकी मुरली के प्रति सौतिया डाह (ईर्ष्या) रखती हैं।

    7. सप्रसंग व्याख्या करो (लगभग 100 शब्दों में) :

    (क) ‘मनुष्य हौं तो वही ....................... नित नंद की धेनु मँझारन।’ 

    उत्तर: प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'आलोक भाग-I' में संकलित कवि रसखान के सवैयों से ली गई हैं। इसमें कवि ने पुनर्जन्म की स्थिति में भी ब्रज में रहने की कामना की है। व्याख्या: रसखान कहते हैं कि यदि ईश्वर मुझे अगले जन्म में मनुष्य बनाए, तो मैं गोकुल गाँव के ग्वालों के बीच बसना चाहता हूँ। यदि मुझे पशु योनि मिले, तो मैं चाहता हूँ कि मैं नंद बाबा की गायों के बीच चरूँ। यदि मैं पत्थर बनूँ, तो उसी गोवर्धन पर्वत का पत्थर बनूँ जिसे कृष्ण ने इंद्र के कोप से बचाने के लिए अपनी अंगुली पर धारण किया था। और यदि मैं पक्षी बनूँ, तो यमुना किनारे कदंब की डालों पर मेरा बसेरा हो। संक्षेप में, कवि हर भौतिक रूप में केवल अपने आराध्य की लीला-भूमि से जुड़ा रहना चाहते हैं।

    (ख) ‘रसखान कबौं इन आँखिन .......... करील के कुंजन ऊपर वारौं॥’ 

    उत्तर: प्रसंग: यह सवैया कृष्ण की वस्तुओं और ब्रज के प्राकृतिक सौंदर्य के प्रति कवि के असीम लगाव को दर्शाता है। 

    व्याख्या: रसखान कहते हैं कि कृष्ण की लाठी और कंबल के बदले वे तीनों लोकों के राज्य का त्याग कर सकते हैं। वे नंद की गायों को चराने के सुख के लिए संसार की आठों सिद्धियों और नौ निधियों के सुख को भूलना चाहते हैं। कवि की तीव्र इच्छा है कि वे अपनी आँखों से ब्रज के वनों, उपवनों और तालाबों को निरंतर निहारते रहें। वे ब्रज की कंटीली झाड़ियों (करील के कुंजन) को सोने के करोड़ों महलों से भी अधिक कीमती मानते हैं और उन पर अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार हैं। यहाँ कवि की भक्ति भौतिक सुखों पर आध्यात्मिक प्रेम की विजय का प्रतीक है।

    (ग) ‘धूरि भरे अति सोभित .............. पैंजनीं बाजतीं पीरीं कछोटी।’ 

    उत्तर: प्रसंग: इन पंक्तियों में कवि ने कृष्ण के बाल-रूप की अनुपम माधुरी का चित्रण किया है।

     व्याख्या: रसखान वर्णन करते हैं कि धूल से सने हुए बालक कृष्ण अत्यंत सुंदर लग रहे हैं। उनके सिर पर एक सुंदर चोटी बंधी है। वे आंगन में खेलते और खाते हुए घूम रहे हैं, उनके पैरों में सुंदर पैंजनी (पायल) बज रही है और उन्होंने पीले रंग की छोटी धोती (कछोटी) पहनी है। कृष्ण की इस बाल-छवि पर रसखान कहते हैं कि करोड़ों कामदेवों का सौंदर्य भी न्योछावर किया जा सकता है। वह कौआ भी बहुत भाग्यशाली है, जो कृष्ण के हाथ से माखन और रोटी छीनकर ले गया, क्योंकि उसे ईश्वर का स्पर्श और सान्निध्य प्राप्त हुआ। यह दृश्य वात्सल्य और भक्ति रस का अद्भुत उदाहरण है।

    (घ) ‘मोरा-पखा सिर ऊपर राखिहौं ...... गोधन ग्वारनि संग फिरौंगी।’ 

    उत्तर: प्रसंग: यहाँ कवि ने एक गोपी के कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और उनके लिए वेश धारण करने की इच्छा का वर्णन किया है। 

    व्याख्या: गोपी अपनी सखी से कहती है कि मैं तुम्हारे कहने पर अपने प्रिय कृष्ण का रूप धारण करने को तैयार हूँ। मैं अपने सिर पर मोरपंख का मुकुट लगाऊँगी, गले में गुंजों की माला पहनूँगी, पीले वस्त्र ओढ़कर और हाथ में लाठी लेकर ग्वालों के साथ वनों में गाय चराऊँगी। वह कहती है कि कृष्ण मुझे इतने प्रिय हैं कि उनके प्रेम के कारण मैं उनके सभी स्वांग (रूप) रचूँगी। हालांकि, वह उस मुरली को अपने होंठों से कभी नहीं लगाएगी, जिसे कृष्ण अपने होंठों पर रखते थे, क्योंकि वह मुरली को अपनी सौत मानती है जिसने कृष्ण को उससे दूर कर दिया है।

    भाषा एवं व्याकरण ज्ञान

    (क) निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखो : मानुष, पसु, पाहन, आँख, छबि, भाग

    उत्तर: 

    तद्भव/देशज शब्दतत्सम रूप
    मानुषमनुष्य
    पसुपशु
    पाहनपाषाण
    आँखअक्षि
    छबिछवि
    भागभाग्य

    (ख) निम्नलिखित शब्दों के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखो : कृष्ण, कालिंदी, खग, गिरि, पुरंदर

    उत्तर: 

    कृष्ण: श्याम, गोपाल, वासुदेव

    कालिंदी: यमुना, तरणि-तनूजा, भानुजा

    खग: पक्षी, विहग, पखेरू

    गिरि: पर्वत, पहाड़, शैल

    पुरंदर: इंद्र, देवराज, सुरेश

    (ग) संधि-विच्छेद करो : पीताम्बर, अनेकानेक, इत्यादि, परमेश्वर, नीरस

    उत्तर: 

    पीताम्बर = पीत + अम्बर (दीर्घ संधि)

    अनेकानेक = अनेक + अनेक (दीर्घ संधि)

    इत्यादि = इति + आदि (यण संधि)

    परमेश्वर = परम + ईश्वर (गुण संधि)

    नीरस = निः + रस (विसर्ग संधि)

    (घ) निम्नलिखित शब्दों के खड़ीबोली (मानक हिंदी) में प्रयुक्त होने वाले रूप बताओ : मेरो, बसेरो, अरु, कामरिया, धूरि, सोभित, माल, सों

    उत्तर: 

    ब्रजभाषा शब्दखड़ीबोली (मानक हिंदी) रूप
    मेरोमेरा
    बसेरोबसेरा (निवास)
    अरुऔर
    कामरियाकंबल
    धूरिधूल
    सोभितसुशोभित
    मालमाला
    सोंसे

    (ङ) निम्नलिखित शब्दों के साथ भाववाचक प्रत्यय ‘ता’ जुड़ा हुआ है - सहजता, मधुरता, सरसता, तल्लीनता, मार्मिकता – ऐसे ही ‘ता’ प्रत्यय वाले पाँच भाववाचक संज्ञा-शब्द लिखो।

    उत्तर: 

    सुंदरता (सुंदर + ता)

    मानवता (मानव + ता)

    कठोरता (कठोर + ता)

    सफलता (सफल + ता)

    योग्यता (योग्य + ता)























































































































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