पद्य - 5
कायर मत बन
अभ्यासमाला के उत्तर
1. 'सही' या 'गलत' रूप में उत्तर दो:
(क) कवि नरेंद्र शर्मा व्यक्तिवादी गीतिकवि के रूप में प्रसिद्ध हैं।
उत्तर: सही
(ख) नरेंद्र शर्मा की कविताओं में भक्ति एवं वैराग्य के स्वर प्रमुख हैं।
उत्तर: गलत (उनकी कविताओं में व्यक्तिगत प्रणयानुभूति, विरह-मिलन, सुख-दुःख और प्रकृति-सौंदर्य के भाव प्रमुख हैं)
(ग) पंडित नरेंद्र शर्मा की गीति-प्रतिभा के दर्शन छोटी अवस्था में ही होने लगे थे।
उत्तर: सही
(घ) 'कायर मत बन' शीर्षक कविता में कवि ने प्रतिहिंसा से दूर रहने का उपदेश दिया है।
उत्तर: गलत (कवि ने कहा है कि यदि प्यार से जीत न मिले, तो हिंसा का जवाब प्रतिहिंसा से देना चाहिए)
(ङ) कवि ने माना है कि प्रतिहिंसा व्यक्ति की कमजोरी को दर्शाती है।
उत्तर: सही
2. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो:
(क) कवि नरेंद्र शर्मा का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर: कवि नरेंद्र शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के 'जहाँगीर' नामक स्थान पर हुआ था।
(ख) कवि नरेंद्र शर्मा आकाशवाणी के किस कार्यक्रम के संचालक नियुक्त हुए थे?
उत्तर: कवि नरेंद्र शर्मा आकाशवाणी के अत्यंत लोकप्रिय कार्यक्रम 'विविध भारती' के संचालक नियुक्त हुए थे।
(ग) 'द्रौपदी' खंड काव्य के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: 'द्रौपदी' खंड काव्य के रचयिता कवि नरेंद्र शर्मा हैं।
(घ) कवि ने किसे ठोकर मारने की बात कही है?
उत्तर: कवि ने मार्ग में आने वाली बाधाओं या रुकावटों (पाहन) को ठोकर मारने की बात कही है।
(ङ) मानवता ने मनुष्य को किस प्रकार सींचा है?
उत्तर: मानवता ने युगों तक अपना खून और पसीना बहाकर मनुष्य को सींचा है।
(च) व्यक्ति को किसके समक्ष आत्म-समर्पण नहीं करना चाहिए?
उत्तर: व्यक्ति को किसी दुष्ट या नीच व्यक्ति (पामर) के समक्ष कभी भी आत्म-समर्पण नहीं करना चाहिए।
3. अति संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में) :
(क) कवि नरेंद्र शर्मा के गीतों एवं कविताओं की विषयगत विविधता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: नरेंद्र शर्मा के गीतों में व्यक्तिगत प्रणयानुभूति, विरह-मिलन, सुख-दुःख, प्रकृति-सौंदर्य, आध्यात्मिकता, राष्ट्रीय भावना और सामाजिक विषमता का चित्रण मिलता है । वे भावुकता के साथ-साथ सामाजिक यथार्थ और प्रगतिशीलता को भी अपनी रचनाओं में समेटे हुए हैं ।
(ख) नरेंद्र शर्मा जी की काव्य-भाषा पर टिप्पणी प्रस्तुत करो।
उत्तर: कवि की भाषा सरल, प्रांजल और संगीतमय लय से युक्त खड़ी बोली है । उनकी काव्य-भाषा में आत्मीयता, चित्रात्मकता और सहज आलंकारिकता जैसे विशेष गुण मौजूद हैं । उन्होंने कोमल और कठोर दोनों ही भावों को बखूबी व्यक्त किया है ।
(ग) कवि ने कैसे जीवन को जीवन नहीं माना है?
उत्तर: कवि के अनुसार समझौता करके जीना या परिस्थितियों के सामने घुटने टेक देना कोई जीना नहीं है । बाधाओं से डरकर केवल गम के आँसू पीते रहना और कायरों की तरह विलाप करना कवि की दृष्टि में सच्चा जीवन नहीं है ।
(घ) कवि ने कायरता को प्रतिहिंसा से अधिक अपवित्र क्यों कहा है?
उत्तर: कवि का मानना है कि प्रतिहिंसा मनुष्य की कमजोरी हो सकती है, लेकिन चुनौतियों से डरकर भागना यानी कायरता सबसे बड़ा पाप है । कायरता मनुष्य के स्वाभिमान और मानवता को नष्ट कर देती है, इसलिए वह अधिक अपवित्र है ।
(ङ) कवि की दृष्टि में जीवन के सत्य का सही माप क्या है?
उत्तर: कवि के अनुसार व्यक्ति की सुरक्षा का कोई मूल्य नहीं है, बल्कि मानवता अमूल्य है । मानवता की रक्षा के लिए स्वयं का बलिदान कर देना और सत्य की रक्षा के लिए अडिग रहना ही जीवन के सत्य का सही माप है ।
4. संक्षेप में उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में) :
(क) 'कायर मत बन' शीर्षक कविता का संदेश क्या है?
उत्तर: इस कविता के माध्यम से कवि नरेंद्र शर्मा मनुष्य को साहस और स्वाभिमान के साथ जीने का संदेश देते हैं । वे कहते हैं कि मनुष्य को परिस्थितियों से समझौता करने के बजाय बाधाओं को ठोकर मारकर अपना मार्ग बनाना चाहिए । कवि का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य चाहे जो भी बने, पर वह कभी 'कायर' न बने । मानवता की रक्षा के लिए मनुष्य को अपना सर्वस्व न्योछावर करने हेतु सदैव तत्पर रहना चाहिए क्योंकि मानवता ही सर्वोपरि है ।
(ख) 'कुछ न करेगा ? किया करेगा- रे मनुष्य- बस कातर क्रंदन' का आशय स्पष्ट करो।
उत्तर: इन पंक्तियों के माध्यम से कवि उन लोगों पर कटाक्ष करते हैं जो संकट आने पर केवल विलाप करते हैं । कवि पूछते हैं कि क्या मनुष्य का जन्म केवल रोने और कातर क्रंदन करने के लिए हुआ है? मानवता ने युगों तक खून-पसीना बहाकर मनुष्य को सींचा है । अतः हाथ पर हाथ धरे बैठे रहकर केवल दुखी होना मनुष्यता के विरुद्ध है। मनुष्य को अपनी शक्ति पहचानकर संघर्ष करना चाहिए, न कि कायरों की तरह रोते रहना चाहिए ।
(ग) 'या तो जीत प्रीति के बल पर, या तेरा पथ चूमे तस्कर'- का तात्पर्य बताओ।
उत्तर: कवि का तात्पर्य है कि जब कोई दुष्ट सामने खड़ा हो, तो पहले उसे प्रेम और शांति से जीतने का प्रयास करना चाहिए । किंतु यदि प्रेम से बात न बने और शत्रु (तस्कर/दुष्ट) आपके मार्ग में बाधा बने, तो उसके सामने झुकना नहीं चाहिए । 'पथ चूमने' का अर्थ यहाँ शत्रु को परास्त कर अपने मार्ग को निष्कंटक बनाने से है। मनुष्य को या तो प्रेम से जीतना चाहिए या फिर अपनी शक्ति से उस अन्याय का अंत कर देना चाहिए ।
(घ) कवि ने प्रतिहिंसा को व्यक्ति की दुर्बलता क्यों कहा है?
उत्तर: कवि के अनुसार अहिंसा और प्रेम ही श्रेष्ठ मार्ग हैं, इसलिए हिंसा के जवाब में हिंसा (प्रतिहिंसा) करना मनुष्य की आत्मिक कमजोरी या दुर्बलता को दर्शाता है । मनुष्य को मानसिक रूप से इतना सबल होना चाहिए कि वह प्रेम से शत्रु को बदल सके। हालाँकि, कवि यह भी स्पष्ट करते हैं कि प्रतिहिंसा दुर्बलता होने के बावजूद 'कायरता' से बेहतर है । क्योंकि चुनौतियों से पीठ फेरकर भागना या कायर बनकर अन्याय सहना, प्रतिहिंसा से भी अधिक अपवित्र और बुरा है ।
5. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में):
(क) सज्जन और दुर्जन के प्रति मनुष्य के व्यवहार कैसे होने चाहिए? पठित 'कायर मत बन' कविता के आधार पर उत्तर दो।
उत्तर: 'कायर मत बन' कविता के आधार पर कवि नरेंद्र शर्मा का मानना है कि मनुष्य का व्यवहार परिस्थितियों के अनुसार गरिमापूर्ण होना चाहिए। सज्जनता और प्रेम मानवीय गुण हैं, इसलिए कवि का सुझाव है कि यदि सामने कोई प्रतिरोधी या शत्रु हो, तो पहले उसे 'प्रीति' यानी प्रेम के बल पर जीतने का प्रयास करना चाहिए । प्रेम से हृदय परिवर्तन संभव है। किंतु, यदि सामने कोई 'पामर' यानी दुष्ट और नीच व्यक्ति 'युद्धं देहि' (चुनौती) कहकर खड़ा हो जाए, तो उसके सामने झुकना या पीठ दिखाकर भागना कायरता है । ऐसी स्थिति में मनुष्य को अपनी रक्षा से अधिक मानवता की रक्षा को महत्व देना चाहिए। यदि प्रेम विफल हो जाए, तो दुष्ट की हिंसा का जवाब शक्ति और प्रतिहिंसा से देना चाहिए ताकि मानवता अक्षुण्ण रहे ।
(ख) 'कायर मत बन' कविता का सारांश लिखो।
उत्तर: 'कायर मत बन' कविता आधुनिक हिंदी काव्य के प्रसिद्ध गीतिकवि नरेंद्र शर्मा द्वारा रचित एक ओजपूर्ण रचना है । इस कविता का मुख्य उद्देश्य मनुष्य को आत्मसम्मान और साहस के साथ संघर्ष करने की प्रेरणा देना है। कवि कहते हैं कि मनुष्य को जीवन में आने वाली बाधाओं से घबराकर 'कातर क्रंदन' (दुखी होकर रोना) नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें ठोकर मारकर अपना रास्ता बनाना चाहिए । समझौतावादी जीवन जीने के बजाय अन्याय का डटकर मुकाबला करना ही श्रेयस्कर है। कवि स्पष्ट करते हैं कि मानवता अमूल्य है और इसकी रक्षा के लिए आत्म-बलिदान भी करना पड़े तो पीछे नहीं हटना चाहिए । कविता का मूल सार यही है कि मनुष्य को सब कुछ स्वीकार करना चाहिए, पर उसे कभी कायर बनकर दुष्ट के सामने आत्म-समर्पण नहीं करना चाहिए ।
(ग) कवि नरेंद्र शर्मा का साहित्यिक परिचय दो।
उत्तर: कवि नरेंद्र शर्मा (1913-1989) आधुनिक हिंदी काव्यधारा के अंतर्गत 'छायावादोत्तर' युग के एक प्रसिद्ध व्यक्तिवादी गीतिकवि हैं । उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के जहाँगीर गाँव में हुआ था । उनकी शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हुई और उन्होंने आकाशवाणी के 'विविध भारती' कार्यक्रम के संचालक के रूप में हिंदी गीतों को अत्यधिक लोकप्रिय बनाया । शर्मा जी मूलतः भावुक और कल्पनाशील कवि थे, जिनकी रचनाओं में मानवतावाद, सामाजिक यथार्थ और प्रगतिशीलता के दर्शन होते हैं । उनकी प्रमुख काव्य-कृतियों में 'प्रभात फेरी', 'प्रवासी के गीत', 'पलाशवन', 'मिट्टी के फूल', 'रक्त चंदन' और 'द्रौपदी' (खंडकाव्य) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं । उनकी भाषा सरल, प्रांजल और सांगीतिक लय से युक्त खड़ी बोली है ।
6. प्रसंग सहित व्याख्या करो :
(क) "ले-दे कर जीना..... युगों तक खून-पसीना।"
उत्तर: संदर्भ: ये पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'आलोक भाग 2' के अंतर्गत कवि नरेंद्र शर्मा द्वारा रचित 'कायर मत बन' शीर्षक कविता से ली गई हैं ।
प्रसंग: इन पंक्तियों में कवि मनुष्य को समझौतावादी जीवन छोड़कर संघर्ष करने और अपनी मानवीय गरिमा को पहचानने की प्रेरणा दे रहे हैं ।
व्याख्या : कवि कहते हैं कि परिस्थितियों से समझौता करके (ले-दे कर) जीना वास्तव में कोई जीवन नहीं है । मनुष्य को कब तक अपने दुखों को मन में दबाकर (गम के आँसू पीना) बेबसी का जीवन जीना चाहिए? हमें यह याद रखना चाहिए कि इस मानवता का निर्माण रातों-रात नहीं हुआ है, बल्कि इसे विकसित करने के लिए पूर्वजों ने युगों तक अपना कठिन परिश्रम और रक्त (खून-पसीना) बहाया है । अतः इस अनमोल मानवता को कायरता के कारण व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए ।
(ख) "युद्धं देहि' कहे जब.... तेरा पथ चूमे तस्कर।"
उत्तर: संदर्भ: ये पंक्तियाँ कवि नरेंद्र शर्मा की प्रसिद्ध कविता 'कायर मत बन' से अवतरित हैं ।
प्रसंग: यहाँ कवि ने दुष्ट शत्रुओं के प्रति अपनाए जाने वाले साहसपूर्ण व्यवहार का वर्णन किया है ।
व्याख्या : कवि के अनुसार, यदि कोई नीच या दुष्ट व्यक्ति (पामर) आपको युद्ध की चुनौती (युद्धं देहि) दे, तो अहिंसा की झूठी दुहाई देकर मैदान छोड़कर भागना (पीठ फेरना) नहीं चाहिए । मनुष्य को सबसे पहले उस शत्रु को प्रेम और आत्मीयता (प्रीति) से जीतने का प्रयास करना चाहिए । किंतु यदि वह प्रेम की भाषा न समझे, तो अपनी शक्ति का ऐसा प्रदर्शन करें कि वह अपराधी (तस्कर) आपके सामने नतमस्तक हो जाए और आपका मार्ग छोड़ दे । कायर बनकर अन्याय सहने से बेहतर लड़ना है ।
भाषा एवं व्याकरण-ज्ञान
1. खाली जगहों में 'न', 'नहीं' अथवा 'मत' का प्रयोग करके वाक्यों को फिर से लिखो :
(क) तू कभी भी कायर .... बन ।
उत्तर: तू कभी भी कायर मत बन।
(ख) तुम कभी भी कायर.... बनो।
उत्तर: तुम कभी भी कायर मत बनो।
(ग) आप कभी भी कायर.... बनें।
उत्तर: आप कभी भी कायर न बनें।
(घ) हमें कभी भी कायर बनना.... चाहिए।
उत्तर: हमें कभी भी कायर बनना नहीं चाहिए।
2. अर्थ लिखकर निम्नलिखित मुहावरों का वाक्य में प्रयोग करो : ले-दे कर जीना, गम के आँसू पीना, खून-पसीना बहाना, पीठ फेरना, टस से मस न होना, कालिख लगना, कमर कसना, आँचल में बाँधना
उत्तर:
ले-दे कर जीना (अर्थ: समझौता करके जीना): स्वाभिमानी व्यक्ति कभी ले-दे कर जीना पसंद नहीं करते।
गम के आँसू पीना (अर्थ: मन के दुःख को मन में ही दबा लेना): निर्धन व्यक्ति समाज के अत्याचार सहकर गम के आँसू पीता रहता है।
खून-पसीना बहाना (अर्थ: बहुत कठिन परिश्रम करना): किसान कड़ी धूप में खून-पसीना बहाकर अनाज उगाता है।
पीठ फेरना (अर्थ: चुनौती से भागना या कायरता दिखाना): वीर सैनिक युद्ध के मैदान से कभी पीठ नहीं फेरते।
टस से मस न होना (अर्थ: अडिग या अविचलित रहना): तमाम बाधाओं के बावजूद गांधीजी अपने सत्य के मार्ग से टस से मस न हुए।
कालिख लगना (अर्थ: कलंक लगना या बदनामी होना): गलत काम करने से पूरे परिवार के नाम पर कालिख लग जाती है।
कमर कसना (अर्थ: किसी काम के लिए पूरी तरह तैयार होना): परीक्षा नजदीक आते ही विद्यार्थियों ने अपनी कमर कस ली है।
आँचल में बाँधना (अर्थ: किसी बात को अच्छी तरह याद रखना): माँ की दी हुई सीख को हमेशा अपने आँचल में बाँधकर रखना चाहिए।
3. निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध रूप में लिखो :
(क) सभा में अनेकों लोग एकत्र हुए हैं।
उत्तर: सभा में अनेक लोग एकत्र हुए हैं।
(ख) मुझे दो सौ रुपए चाहिए।
उत्तर: मुझे दो सौ रुपये चाहिए।
(ग) बच्चे छत में खेल रहे हैं।
उत्तर: बच्चे छत पर खेल रहे हैं।
(घ) मैंने यह घड़ी सात सौ रुपए से ली है।
उत्तर: मैंने यह घड़ी सात सौ रुपये में ली है।
(ङ) मेरे को घर जाना है।
उत्तर: मुझे घर जाना है।
(च) बच्चे को काटकर गाजर खिलाओ।
उत्तर: गाजर काटकर बच्चे को खिलाओ।
(छ) उसने पुस्तक पढ़ चुका।
उत्तर: वह पुस्तक पढ़ चुका है।
(ज) जब भी आप आओ, मुझसे मिलो।
उत्तर: जब भी आप आएँ, मुझसे मिलें।
(झ) हम रात को देर से भोजन खाते हैं।
उत्तर: हम रात को देर से भोजन करते हैं।
(ञ) बाघ और बकरी एक ही घाट पानी पीती है।
उत्तर: बाघ और बकरी एक ही घाट पानी पीते हैं।
4. निम्नलिखित शब्दों से प्रत्ययों को अलग करो :
आधुनिक, विषमता, भलाई, लड़कपन, बुढ़ापा, मालिन, गरीबी
उत्तर:
आधुनिक: अधुना + इक
विषमता: विषम + ता
भलाई: भला + आई
लड़कपन: लड़का + पन
बुढ़ापा: बूढ़ा + आपा
मालिन: माली + इन
गरीबी: गरीब + ई
5. कोष्ठक में दिए गए निर्देशानुसार वाक्यों को परिवर्तित करो :
(क) मैंने एक दुबला-पतला आदमी देखा था। (मिश्र वाक्य बनाओ)
उत्तर:मैंने एक आदमी देखा था जो दुबला-पतला था।
(ख) जो विद्यार्थी मेहनत करता है वह अवश्य सफल होता है। (सरल वाक्य बनाओ)
उत्तर:मेहनती विद्यार्थी अवश्य सफल होता है।
(ग) किसान को अपने परिश्रम का लाभ नहीं मिलता। (संयुक्त वाक्य बनाओ)
उत्तर: किसान परिश्रम करता है, पर उसे उसका लाभ नहीं मिलता।
(घ) लड़का बाजार जाएगा। (निषेधवाचक वाक्य बनाओ)
उत्तर: लड़का बाजार नहीं जाएगा।
(ङ) लड़की गाना गाएगी। (प्रश्नवाचक वाक्य बनाओ)
उत्तर: क्या लड़की गाना गाएगी ?