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    पद्य - 3

    जो बीत गयी

    अभ्यासमाला

    बोध एवं विचार

    1. सही विकल्प का चयन करो :

    (क) कवि हरिवंशराय बच्चन का जन्म हुआ था— 

    (अ) सन् 1905 में 

    (आ) सन् 1906 में 

    (इ) सन् 1907 में 

    (ई) सन् 1908 में

    उत्तर: (इ) सन् 1907 में

    (ख) कवि ने इस कविता में बीती बात को भूला कर क्या करने का संदेश दिया है— 

    (अ) वर्तमान की चिंता 

    (आ) भविष्य की चिंता 

    (इ) अतीत की चिंता 

    (ई) सुख की चिंता

    उत्तर: (अ) वर्तमान की चिंता

    2. संक्षेप में उत्तर दो :

    (क) अपने प्रिय तारों के टूट जाने पर क्या अंबर कभी शोक मनाता है ? 

    उत्तर: नहीं, अंबर के बहुत से तारे टूट जाते हैं और उसके बहुत से प्यारे (तारे) छूट जाते हैं, लेकिन अपने टूटे हुए तारों पर अंबर कभी शोक नहीं मनाता।

    (ख) हमें मधुवन और मदिरालय से क्या शिक्षा मिलती है ? 

    उत्तर: मधुवन से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जिस प्रकार फूल सूखने या कलियाँ मुरझाने पर वह शोर नहीं मचाता, वैसे ही हमें भी अपने नुकसान पर दुखी नहीं होना चाहिए। मदिरालय से हमें यह शिक्षा मिलती है कि वह अपने प्यालों के टूटने पर कभी पछतावा नहीं करता, वैसे ही हमें भी जीवन की असफलताओं को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए।

    (ग) कवि ने 'अंबर के आनन' को देखने की बात क्यों की है ? 

    उत्तर: कवि ने अंबर के आनन (मुख) को देखने की बात इसलिए की है ताकि मनुष्य यह देख सके कि विशाल आकाश से भी कितने ही तारे टूटकर अलग हो जाते हैं, पर वह विचलित नहीं होता। यह मनुष्य को सिखाता है कि जो छूट गया है, उसे भूलकर धैर्य बनाए रखना चाहिए।

    (घ) प्यालों के टूट जाने पर मदिरालय क्यों नहीं पश्चाताप करता ? 

    उत्तर: मदिरालय जानता है कि प्याले मिट्टी के बने होते हैं और उनका टूटना स्वाभाविक है। मदिरालय प्यालों के टूटने पर शोक मनाने के बजाय नए प्यालों के साथ अपनी रौनक बनाए रखता है।

    (ङ) मधु के घट और प्यालों से किन लोगों का लगाव होता है ?

     उत्तर: जो लोग केवल बाहरी वस्तुओं या मिट्टी के मोह में बँधे होते हैं, उनका लगाव मधु के घट और प्यालों से होता है।

    (च) ‘जो मादकता के मारे हैं, वे मधु लूटा ही करते हैं।’ - इससे कवि क्या कहना चाहते हैं ?

     उत्तर: इस पंक्ति के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि जो लोग जीवन के सच्चे प्रेमी हैं और आनंद से भरे हुए हैं, वे छोटी-मोटी हानियों या नुकसान की चिंता नहीं करते। वे जीवन का भरपूर आनंद उठाने में विश्वास रखते हैं और बीती बातों पर दुखी नहीं होते।

    (छ) उक्त कविता में मानव जीवन की तुलना किन-किन चीजों से की गई है ? सोदाहरण उत्तर दो। 

    उत्तर: कविता में मानव जीवन की तुलना निम्नलिखित चीजों से की गई है:

    • तारा: जिस प्रकार आकाश का तारा टूट जाने पर दोबारा नहीं मिलता, वैसे ही प्रिय व्यक्ति या वस्तु के खो जाने पर वह वापस नहीं आती।


    • कुसुम (फूल): जैसे मधुवन के फूल सूखने पर मधुवन शोर नहीं मचाता, वैसे ही मनुष्य को अपने जीवन के सुखों के बीत जाने पर धैर्य रखना चाहिए।


    • घट और प्याले: मिट्टी के प्याले टूटने पर मदिरालय शोक नहीं करता, इसी प्रकार जीवन की नश्वरता को स्वीकार करना चाहिए।

    (ज) इस कविता से हमें क्या शिक्षा मिलती है ? 

    उत्तर: यह कविता हमें शिक्षा देती है कि जीवन में दुख, हानि या किसी प्रिय के बिछड़ने पर शोक मनाना व्यर्थ है। जो बीत गया वह वापस नहीं आ सकता, इसलिए हमें वर्तमान की चिंता करनी चाहिए और जीवन का भरपूर आनंद उठाना चाहिए।

    3. सप्रसंग व्याख्या करो :

    (क) जीवन में एक सितारा था,

    माना वह बेहद प्यारा था,

    वह डूब गया तो डूब गया,

    अंबर के आनन को देखो।

    उत्तर: संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'आलोक' के 'जो बीत गयी' शीर्षक कविता से ली गई हैं । इसके रचयिता प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन हैं I

    प्रसंग: इन पंक्तियों में कवि ने आकाश के उदाहरण के माध्यम से मनुष्य को अपने प्रियजनों के खोने पर शोक न मनाने का संदेश दिया है ।

    व्याख्या: बच्चन जी कहते हैं कि यदि मनुष्य के जीवन में कोई बहुत प्रिय व्यक्ति या वस्तु (सितारे के समान) थी और वह अब दूर चली गई है, तो उस पर विलाप करना व्यर्थ है । वे 'अंबर के आनन' यानी आकाश के चेहरे को देखने की सलाह देते हैं । आकाश के न जाने कितने प्यारे तारे टूटकर गिर जाते हैं, परंतु अंबर उन टूटे तारों के लिए कभी शोक नहीं मनाता । उसी प्रकार, हमें भी अतीत के दुखों को भूलकर वर्तमान में आनंद के साथ जीना चाहिए ।

    (ख) मृदु मिट्टी के हैं बने हुए,

    मधु घट फूटा ही करते हैं,

    लघु जीवन लेकर आए हैं,

    प्याले फूटा ही करते हैं।

    उत्तर: संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित कविता 'जो बीत गयी' से अवतरित हैं ।

    प्रसंग: कवि ने यहाँ मदिरालय और प्यालों के माध्यम से जीवन की नश्वरता और क्षणभंगुरता को समझाया है।

    व्याख्या: कवि कहते हैं कि संसार की सभी वस्तुएँ कोमल मिट्टी की बनी हुई हैं, जिनका नष्ट होना निश्चित है । जैसे शराब के घड़े (मधु घट) और प्याले मिट्टी के बने होने के कारण अक्सर टूटते रहते हैं, वैसे ही मानव जीवन भी छोटा और अस्थिर है। मदिरालय इन प्यालों के टूटने पर कभी दुखी नहीं होता क्योंकि वह इनकी क्षणभंगुरता को जानता है। अतः कवि हमें यह शिक्षा देना चाहते हैं कि शरीर और संसार की वस्तुएँ नाशवान हैं। हमें उनके टूटने या खोने पर पश्चाताप करने के बजाय जीवन के शेष समय को सुखपूर्वक बिताना चाहिए ।



























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