Skip to Content
Note SL
  • Home
  • Privacy Policy
  • About
  • Terms and Condition's
  • Assam Veterinary Test
Note SL
      • Home
      • Privacy Policy
      • About
      • Terms and Condition's
      • Assam Veterinary Test

    पद्य - 9

    दोहा-दशक


    अभ्यासमाला

    बोध एवं विचार

    1. सही विकल्प का चयन करो:

    (क) कवि बिहारीलाल किस काल के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं?

    उत्तर: कवि बिहारीलाल रीतिकाल के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं।

    (ख) कविवर बिहारी की काव्य-प्रतिभा से प्रसन्न होने वाले मुगल सम्राट थे -

    उत्तर: कविवर बिहारी की काव्य-प्रतिभा से प्रसन्न होने वाले मुगल सम्राट शाहजहाँ थे।

    (ग) कवि बिहारी का देहावसान कब हुआ?

    उत्तर: कविवर बिहारी का देहावसान 1663 ई. में हुआ।

    (घ) श्रीकृष्ण के सिर पर क्या शोभित है?

    उत्तर: श्रीकृष्ण के सिर पर मुकुट शोभित है।

    (ङ) कवि बिहारी ने किन्हें सदा साथ रहने वाली संपत्ति माना है?

    उत्तर: कवि बिहारी ने जदुपति (श्रीकृष्ण) को अपनी सदा साथ रहने वाली संपत्ति माना है।

    2. निम्नलिखित कथन शुद्ध हैं या अशुद्ध, बताओ:

    (क) हिन्दी के समस्त कवियों में भी बिहारीलाल अग्रिम पंक्ति के अधिकारी हैं।

    उत्तर: शुद्ध

    (ख) कविवर बिहारी को संस्कृत और प्राकृत के प्रसिद्ध काव्य-ग्रंथों के अध्ययन का अवसर प्राप्त नहीं हुआ था।

    उत्तर: अशुद्ध (उन्हें अध्ययन का अवसर प्राप्त हुआ था)।

    (ग) 1645 ई. के आस-पास कवि बिहारी वृत्ति लेने जयपुर पहुँचे थे।

    उत्तर: शुद्ध

    (घ) कवि बिहारी के अनुसार ओछा व्यक्ति भी बड़ा बन सकता है।

    उत्तर: अशुद्ध (ओछे व्यक्ति आकाश को छूने की कोशिश करने पर भी बड़े नहीं हो सकते)।

    (ङ) कवि बिहारी का कहना है कि दुर्दशाग्रस्त होने पर भी धन का संचय करते रहना कोई नीति नहीं है।

    उत्तर: शुद्ध

    3. पूर्ण वाक्य में उत्तर दो:

    (क) कवि बिहारी ने मुख्य रूप से कैसे दोहों की रचना की है?

    उत्तर: कवि बिहारी ने मुख्य रूप से प्रेम-श्रृंगार और गौण रूप से भक्ति एवं नीति के दोहों की रचना की है।

    (ख) कविवर बिहारी किनके आग्रह पर जयपुर में ही रुक गए?

    उत्तर: कविवर बिहारी जयपुर के महाराज जयसिंह और चौहानी रानी के आग्रह पर जयपुर में ही रुक गए।

    (ग) कवि बिहारी की ख्याति का एकमात्र आधार-ग्रंथ किस नाम से प्रसिद्ध है?

    उत्तर: कवि बिहारी की ख्याति का एकमात्र आधार-ग्रंथ 'बिहारी सतसई' के नाम से प्रसिद्ध है।

    (घ) किसमें किससे सौ गुनी अधिक मादकता होती है?

    उत्तर: कनक (सोने/धन-संपत्ति) में कनक (धतूरे) से सौ गुनी अधिक मादकता होती है।

    (ङ) कवि ने गोपीनाथ कृष्ण से क्या-क्या न गिनने की प्रार्थना की है?

    उत्तर: कवि ने गोपीनाथ कृष्ण से उनके गुण और औगुण (अवगुण) न गिनने की प्रार्थना की है।

    4. अति संक्षिप्त में उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में) :

    (क) किस परिस्थिति में कविवर बिहारी काव्य-रचना के लिए जयपुर में ही रुक गए थे?

    उत्तर: महाराज जयसिंह और उनकी चौहानी रानी के विशेष आग्रह पर बिहारीलाल जयपुर में रुक गए। वहाँ उन्होंने प्रत्येक दोहे की रचना के बदले एक 'अशर्फी' प्राप्त करने की शर्त पर काव्य-लेखन स्वीकार किया।

    (ख) 'यहि बानक मो मन बसौ, सदा बिहारीलाल' का भाव क्या है?

    उत्तर: इस पंक्ति का भाव है कि श्रीकृष्ण का वह मनमोहक रूप, जिसमें उनके सिर पर मुकुट, कमर में पीतांबर, हाथों में मुरली और गले में वैजयंती माला है, कवि के हृदय में सदैव के लिए बस जाए।

    (ग) 'ज्यों-ज्यों बूड़ै स्याम रंग, त्यों-त्यों उज्जलु होई' का आशय स्पष्ट करो।

    उत्तर: इसका आशय यह है कि जैसे-जैसे मनुष्य का मन श्रीकृष्ण के प्रेम (श्याम रंग) में डूबता है, वैसे-वैसे वह सांसारिक विकारों से मुक्त होकर पवित्र और उज्ज्वल (प्रकाशमय) होता जाता है।

    (घ) 'आँटे पर प्रानन हरै, काँटे लौं लगि पाय' के जरिए कवि क्या कहना चाहते हैं?

    उत्तर: कवि कहना चाहते हैं कि दुष्ट व्यक्ति का स्वभाव बड़ा ही भयानक होता है। वह विनम्रता का ढोंग करता है, परंतु अवसर मिलते ही काँटे की तरह पैरों में चुभकर प्राणों को संकट में डाल देता है।

    (ङ) 'मन काँचै नाचै वृथा, साँचै राँचै राम' का तात्पर्य बताओ।

    उत्तर: इसका तात्पर्य है कि जिनका मन भक्ति में कच्चा या चंचल होता है, उनके लिए बाहरी दिखावा करना व्यर्थ है। ईश्वर केवल उन्हीं पर प्रसन्न होते हैं, जो सच्चे मन से उनकी आराधना करते हैं।

    5. संक्षिप्त में उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में) :

    (क) कवि के अनुसार अनुरागी चित्त का स्वभाव कैसा होता है?

    उत्तर: कवि बिहारी के अनुसार अनुरागी (प्रेमी) चित्त का स्वभाव अत्यंत विचित्र और अनोखा होता है। इसकी गति को समझना सामान्य मनुष्य के लिए कठिन है。 सामान्यतः काली वस्तु में डूबने पर चीज काली हो जाती है, परंतु ईश्वर के प्रति अनुरागी मन जैसे-जैसे 'श्याम' (श्रीकृष्ण) के काले रंग में डूबता है, वैसे-वैसे वह और अधिक उज्ज्वल, पवित्र और निष्पाप होता जाता है।

    (ख) सज्जन का स्नेह कैसा होता है?

    उत्तर: सज्जन व्यक्ति का स्नेह 'मंजीठ' (चोल) के रंग की तरह गहरा और स्थायी होता है। जिस प्रकार मंजीठ से रंगा हुआ कपड़ा पुराना होने या फटने पर भी अपना रंग नहीं छोड़ता, उसी प्रकार सज्जन का प्रेम विकट परिस्थितियों या अनबन होने पर भी कम नहीं होता। उनके स्वभाव में एक गंभीरता और अटूट चटक बनी रहती है जो फीकी नहीं पड़ती।

    (ग) धन के संचय के संदर्भ में कवि ने कौन-सा उपदेश दिया है?

    उत्तर: कवि बिहारी ने उपदेश दिया है कि केवल धन संचय करना श्रेष्ठ नीति नहीं है, विशेषकर तब जब व्यक्ति दुर्दशाग्रस्त हो। सच्चा धन वह है जो खाने और खर्च करने के बाद शेष बचे। यदि परोपकार और स्वयं की आवश्यकताओं के बाद धन बचता है, तो उसे करोड़ों की संख्या में संचय करना उचित है, अन्यथा केवल कंजूसी से जोड़ा गया धन व्यर्थ है।

    (घ) दुर्जन के स्वभाव के बारे में कवि ने क्या कहा है?

    उत्तर: कवि कहते हैं कि दुर्जन व्यक्ति यदि अचानक अपना स्वभाव बदलकर विनम्रता दिखाने लगे, तो भी उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए। दुर्जन का नया और कोमल व्यवहार घातक हो सकता है। जिस प्रकार एक धनुष झुकता है तो बाण छोड़ने के लिए, वैसे ही दुष्ट व्यक्ति झुककर अवसर पाते ही काँटे की तरह पैरों में चुभकर प्राणों को संकट में डाल देता है।

    (ङ) कवि बिहारी किस वेश में अपने आराध्य कृष्ण को मन में बसा लेना चाहते हैं?

    उत्तर: कवि बिहारी श्रीकृष्ण के उस मनोहारी रूप को अपने हृदय में बसाना चाहते हैं जिसमें उनके सिर पर मोर-मुकुट, कमर में पीतांबर (काछनी), हाथों में मुरली और वक्षस्थल पर वैजयंती माला सुशोभित है। कवि के अनुसार, कृष्ण का यही मनमोहक और पारंपरिक वेश (बानक) उनके मन मंदिर में सदैव निवास करना चाहिए, क्योंकि वे ही उनके संकटों को दूर करने वाले हैं।

    (च) अपने उद्धार के प्रसंग में कवि ने गोपीनाथ कृष्णजी से क्या निवेदन किया है?

    उत्तर: कवि बिहारी ने गोपीनाथ कृष्ण से प्रार्थना की है कि वे उनके उद्धार के लिए अपने हृदय में वही करुणा लाएं, जो उन्होंने अन्य पतितों (पापियों) का उद्धार करते समय दिखाई थी। कवि निवेदन करते हैं कि प्रभु उनके अनगिनत गुणों और अवगुणों की गणना न करें। वे चाहते हैं कि उनके दोषों को अनदेखा कर ईश्वर उन्हें भी भवसागर से पार लगा दें।

    (छ) कवि बिहारी की लोकप्रियता पर एक संक्षिप्त टिप्पणी प्रस्तुत करो।

    उत्तर: बिहारीलाल रीतिकाल के सर्वश्रेष्ठ कवि हैं, जिनकी लोकप्रियता उनकी एकमात्र रचना 'बिहारी सतसई' के कारण आज भी अटूट है। उन्होंने दोहे जैसे छोटे छंद में 'गागर में सागर' भरने का अद्भुत कार्य किया है। उनकी भाषा सरस और प्रौढ़ ब्रजभाषा है। यूरोपीय विद्वान डॉ. ग्रियर्सन के अनुसार, समूचे यूरोप में इस ग्रंथ के समकक्ष कोई अन्य रचना नहीं है।

    6. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में) :

    (क) कवि बिहारीलाल का साहित्यिक परिचय दो।

    उत्तर: कविवर बिहारीलाल हिन्दी साहित्य के रीतिकाल के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं। उनका जन्म 1595 ई. में ग्वालियर के बसुवा गोविन्दपुर में हुआ था। उन्होंने संस्कृत, प्राकृत और फारसी भाषाओं का गहरा अध्ययन किया था। साहित्यिक दृष्टि से वे 'रीतिसिद्ध' काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि हैं। उन्होंने मुख्य रूप से 'प्रेम-श्रृंगार' पर आधारित दोहों की रचना की, लेकिन उनके काव्य में 'भक्ति' और 'नीति' का भी सुंदर समन्वय मिलता है। उन्होंने अपनी काव्य-प्रतिभा से मुगल बादशाह शाहजहाँ और जयपुर नरेश जयसिंह जैसे राजाओं को प्रभावित किया। उनकी एकमात्र प्रसिद्ध रचना 'बिहारी सतसई' है, जो ब्रजभाषा में रचित है। बिहारी ने छोटे-से 'दोहा' छंद में गंभीर भाव भरकर 'गागर में सागर' भरने की कला को सिद्ध किया है। 1663 ई. में उनका देहावसान हुआ।

    (ख) 'बिहारी सतसई' पर एक टिप्पणी लिखो।

    उत्तर: 'बिहारी सतसई' कवि बिहारीलाल की ख्याति का एकमात्र और अमर आधार-ग्रंथ है। यह लगभग सात सौ दोहों का एक अनुपम संग्रह है, जिसे 'श्रृंगार, भक्ति और नीति की त्रिवेणी' कहा जाता है। इस ग्रंथ की भाषा प्रौढ़ और सुमधुर ब्रजभाषा है। इसकी लोकप्रियता इतनी अधिक है कि यूरोपीय विद्वान डॉ. ग्रियर्सन ने कहा कि पूरे यूरोप में इसके समकक्ष कोई दूसरी रचना नहीं है। सतसई के दोहों के बारे में प्रसिद्ध है— "सतसैया के दोहरे ज्यों नावक के तीर, देखन में छोटे लगै घाव करै गंभीर"। बिहारी ने इस ग्रंथ के माध्यम से सूक्ष्म भावों और प्रेम की मार्मिक अवस्थाओं को अत्यंत संक्षेप में व्यक्त किया है। यह ग्रंथ आज भी काव्य-रसिकों और शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

    (ग) कवि बिहारी ने अपने भक्तिपरक दोहों के माध्यम से क्या कहा है? पठित दोहों के आधार पर स्पष्ट करो।

    उत्तर: पठित 'दोहा-दशक' के प्रथम पाँच दोहे भक्तिपरक हैं। इनके माध्यम से बिहारी ने सच्ची भक्ति और समर्पण का संदेश दिया है। वे कहते हैं कि माला जपने, माथे पर तिलक लगाने या आडंबर करने से ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती; ईश्वर तो केवल सच्चे मन की भक्ति से प्रसन्न होते हैं। कवि अपने आराध्य श्रीकृष्ण के उस मनमोहक रूप को अपने हृदय में बसाना चाहते हैं, जिसमें वे मुकुट, मुरली और वैजयंती माला धारण किए हुए हैं। वे सांसारिक धन के बजाय 'यदुपति' (कृष्ण) को ही अपनी स्थायी संपत्ति मानते हैं, जो विपत्तियों को दूर करने वाले हैं। साथ ही, वे अनुरागी चित्त की विलक्षणता बताते हैं कि प्रभु के प्रेम में मन जितना डूबता है, उतना ही उज्ज्वल होता जाता है। अंततः वे ईश्वर से अपने दोषों को न गिनने और पतित-पावन रूप में अपना उद्धार करने की प्रार्थना करते हैं।

    (घ) पठित दोहों के आधार पर बताओ कि कवि बिहारी के नीतिपरक दोहों का प्रतिपाद्य क्या है?

    उत्तर: पठित पाठ के अंतिम पाँच दोहे नीतिपरक हैं, जो जीवन के व्यावहारिक सत्य को प्रकट करते हैं। इनका मुख्य प्रतिपाद्य मनुष्य को आचरण और व्यवहार की शिक्षा देना है। कवि बताते हैं कि सज्जन का प्रेम गंभीर और स्थायी होता है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी फीका नहीं पड़ता। वे चेतावनी देते हैं कि दुर्जन यदि अचानक विनम्रता दिखाए, तो भी उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह अवसर मिलते ही चोट पहुँचाता है। धन के संचय के विषय में वे कहते हैं कि केवल जोड़ना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि धन का सदुपयोग और खर्च करना ही उसकी सार्थकता है। 'कनक-कनक' वाले दोहे के माध्यम से वे बताते हैं कि धन का नशा धतूरे से भी अधिक खतरनाक होता है जो मनुष्य को पागल बना देता है। अंत में, वे संदेश देते हैं कि ओछा व्यक्ति बाहरी प्रदर्शन से कभी महान नहीं बन सकता।

    7. सप्रसंग व्याख्या करो (लगभग 100 शब्दों में) :

    (क) 'कोऊ कोरिक संग्रहो ... बिपति बिदारनहार ॥'

    उत्तर: प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'आलोक भाग-I' में संकलित कवि बिहारीलाल द्वारा रचित 'दोहा-दशक' से ली गई हैं।

    व्याख्या: इस दोहे में कवि सांसारिक धन की तुलना में ईश्वरीय भक्ति को श्रेष्ठ बताते हैं। वे कहते हैं कि कोई भले ही करोड़ों का धन संग्रह करे या कोई लाखों-हजारों जोड़े, लेकिन मेरे लिए तो 'यदुपति' (श्रीकृष्ण) ही वास्तविक संपत्ति हैं। बिहारीलाल जी का मानना है कि सांसारिक धन संकट के समय साथ छोड़ सकता है, परंतु श्रीकृष्ण वह संपत्ति हैं जो सदैव साथ रहते हैं और भक्तों की समस्त विपत्तियों का विनाश करने वाले हैं। यहाँ कवि की अनन्य भक्ति और प्रभु पर विश्वास प्रकट होता है। वे भौतिक सुखों के बजाय आध्यात्मिक संपदा को जीवन का आधार मानते हैं।

    (ख) 'जय-माला, छापैं, तिलक ... साँचै राँचै रामु ॥'

    उत्तर: प्रसंग: यह दोहा कविवर बिहारी की 'सतसई' के भक्तिपरक दोहों के अंतर्गत 'दोहा-दशक' से उद्धृत है।

    व्याख्या: इस दोहे में कवि ने भक्ति के नाम पर किए जाने वाले बाहरी आडंबरों का विरोध किया है। वे कहते हैं कि हाथ में माला फेरने, माथे पर तिलक लगाने या शरीर पर प्रभु के नाम के छापे छपवाने से एक भी कार्य सिद्ध नहीं होता। यदि मनुष्य का मन 'काँचा' (चंचल या अपरिपक्व) है, तो वह केवल व्यर्थ का प्रदर्शन करता है। ईश्वर की प्राप्ति इन दिखावों से नहीं, बल्कि सत्य और निष्कपट हृदय से होती है। कवि का स्पष्ट संदेश है कि भगवान केवल 'सच्चे मन' की भक्ति से ही प्रसन्न होते हैं। यह दोहा समाज में व्याप्त पाखंड पर करारा प्रहार करता है और अंतःकरण की शुद्धि पर बल देता है।

    (ग) 'कनक कनक तैं सौ गुनी ... इहिं पाएँ बौराइ ॥'

    उत्तर: प्रसंग: यह प्रसिद्ध नीतिपरक दोहा रीतिकाल के सिरमौर कवि बिहारीलाल द्वारा रचित है।

    व्याख्या: यहाँ 'यमक' अलंकार के माध्यम से कवि ने स्वर्ण (सोना) और धतूरे की तुलना की है। कवि कहते हैं कि सोने (धन-संपत्ति) में धतूरे की तुलना में सौ गुनी अधिक मादकता या नशा होता है। कारण यह है कि धतूरे को तो 'खाने' के बाद मनुष्य पागल या मदहोश होता है, लेकिन सोने (धन) को तो केवल 'पाने' मात्र से ही व्यक्ति अहंकार में अंधा और पागल हो जाता है। बिहारी जी इस दोहे के माध्यम से समझाना चाहते हैं कि धन का संचय मनुष्य के विवेक को नष्ट कर देता है। यह समाज को अत्यधिक भौतिकवाद और लोभ के खतरों के प्रति सचेत करने वाला एक अत्यंत प्रभावी नीतिपरक संदेश है।

    (घ) 'ओछे बड़े न वै सकें ... फारि निहारै नैन।'

    उत्तर: प्रसंग: प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक के 'दोहा-दशक' के नीतिपरक भाग से लिया गया है।

    व्याख्या: इस दोहे में कवि ने मनुष्य की अंतर्निहित प्रकृति और मर्यादा का वर्णन किया है। कवि कहते हैं कि एक 'ओछा' या तुच्छ स्वभाव वाला व्यक्ति चाहे कितना भी प्रयत्न कर ले या आकाश को छूने की कोशिश करे, वह महान (बड़ा) नहीं बन सकता। इसे स्पष्ट करने के लिए वे आँखों का उदाहरण देते हैं। वे कहते हैं कि यदि हम अपनी आँखों को बहुत 'फाड़कर' या बड़ा करके भी देखें, तो भी वे अपने प्राकृतिक आकार से बड़ी नहीं हो जातीं। इसी प्रकार, दिखावा करने या पद प्राप्त करने से कोई महान नहीं होता; महानता गुणों से आती है। कवि यहाँ संदेश देते हैं कि मनुष्य को अपनी सीमाओं का ज्ञान होना चाहिए और बाहरी प्रदर्शन के बजाय गुणों के विकास पर ध्यान देना चाहिए।

    भाषा एवं व्याकरण ज्ञान

    (क) संधि-विच्छेद करो :

    देहावसान, लोकोक्ति, उज्ज्वल, सज्जन, दुर्जन

    उत्तर: 

    देहावसान: देह + अवसान (दीर्घ संधि)

    लोकोक्ति: लोक + उक्ति (गुण संधि)

    उज्ज्वल: उत् + ज्वल (व्यंजन संधि)

    सज्जन: सत् + जन (व्यंजन संधि)

    दुर्जन: दुः + जन (विसर्ग संधि)

    (ख) विलोम शब्द लिखो :

     अनुराग, पाप, गुण, प्रेम, सज्जन, मित्र, गगन, श्रेष्ठ

    उत्तर: 

    शब्दविलोम (विपरीतार्थक) शब्द
    अनुरागविराग
    पापपुण्य
    गुणऔगुन (अवगुण)
    प्रेमघृणा
    सज्जनदुर्जन
    मित्र (मीत)शत्रु
    गगन (गैन)धरा / धरती
    श्रेष्ठओछा / तुच्छ

    (ग) निम्नलिखित दोहों को खड़ीबोली (मानक हिन्दी) गद्य में लिखो 

    • मीत न नीत गलीत , जो धरियै धन जोरि । खाए खरचैं जो जुरै, तौ जोरिए करोरि ॥

    उत्तर:  दोहा: मीत न नीत गलीत है, जो धरियै धन जोरि । खाएँ खरचैं जो जुरै, तो जोरिए करोरि ॥

    खड़ीबोली गद्य: मित्र! यह कोई अच्छी नीति नहीं है कि दुर्दशाग्रस्त होने पर भी धन का संचय किया जाए। यदि खाने और खर्च करने के बाद भी धन बचता है, तो अवश्य ही करोड़ों की संख्या में धन का संचय करना चाहिए।

    • न ए बिससिये लखि नये, दुर्जन दुसह सुभाय । ऑटे पर प्रानन हरै, काँटे लौं लगि पाय ॥

    उत्तर: दोहा: न ए बिससिये लखि नये, दुर्जन दुसह सुभाय । आँटे पर प्रानन हरै, काँटे लौं लगि पाय ॥

    खड़ीबोली गद्य: दुष्ट व्यक्ति के दुसह (कठोर) स्वभाव को देखकर, उनके नये और विनम्र व्यवहार पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। जिस प्रकार पैर में चुभा हुआ काँटा दुःख देता है, उसी प्रकार दुर्जन व्यक्ति अवसर मिलने पर धोखा देकर प्राणों का हरण कर लेता है।

    (घ) निम्नलिखित समस्त पदों का विग्रह करके समास का नाम बताओ : 

    सतसई, गोपीनाथ, गुन-औगुन, काव्य-रसिक, आजीवन

    उत्तर: 

    सतसई: सात सौ (दोहों) का समाहार — द्विगु समास

    गोपीनाथ: गोपियों के नाथ (कृष्ण) — तत्पुरुष समास

    गुन-औगुन: गुन और औगुन — द्वंद्व समास

    काव्य-रसिक: काव्य के रसिक — तत्पुरुष समास

    आजीवन: जीवन भर — अव्ययीभाव समास (नोट: यह शब्द पाठ के व्याकरणिक संदर्भ से संबंधित है)।

    (ङ) अंतर बनाए रखते हुए निम्नलिखित शब्द-जोरों के अर्थ बताओ :

    कनक-कनक, हार-हार, स्नेह-स्नेह, हल-हल, कल-कल

    उत्तर: 

    कनक - कनक: सोना (धतूरा) और स्वर्ण (सोना/धन)।

    हार - हार: पराजय (हारना) और गले का आभूषण (माला)।

    स्नेह - स्नेह: प्रेम (प्रेम भाव) और तेल/चिकनाई।

    हल - हल: समाधान (उत्तर) और खेत जोतने का यंत्र।

    कल - कल: आने वाला या बीता हुआ दिन और चैन/शांति (या मशीनी पुर्जा)।

































































    Student Review & Feedback

    আপোনাৰ মূল্যৱান মতামত দিয়ক (Share your thoughts & reviews)

    ⏳ Reviews will be verified & published within 24 hours

    📌 পৰীক্ষিত আৰু প্ৰকাশিত মতামত (Verified Reviews)

    🔒 100% Verified

    Loading verified reviews...

    ⏳

    মতামত সফলতাৰে জমা হ'ল!

    Thank you! Your feedback has been received.

    আপোনাৰ মতামত সংৰক্ষণ কৰা হৈছে। সুৰক্ষা আৰু পৰীক্ষণৰ পাছত ২৪ ঘণ্টাৰ ভিতৰত ইয়াক ৱেবচাইটত প্ৰকাশ কৰা হ'ব।












    🚨 Submit Complaint 🚨
    Hii, মই Doli Maam
    কিবা Problem আছিল নেকি Platformat?
    Doli - NoteSL Student Review And Questions
    ×

    প্ৰশ্ন সোধক (Ask Doli)

    প্ৰশ্ন বাৰ্তা (Greeting)

    ⚠️ প্ৰশ্নৰ উত্তৰ পাবলৈ আমাৰ WhatsApp Channel টো join হোৱাটো বাধ্যতামূলক।

    স্বাগতম, Student! Class details synced
    Please enter your real first and last name in English (minimum 2 words). Please enter a valid 10-digit Indian mobile number starting with 6, 7, 8, or 9. Please enter your authentic institution name (generic dummy entries like 'XYZ' are not allowed).
    Join WhatsApp Channel
    ⚠️ Image size must be less than 4MB!
    Please accept the Terms & Conditions and Privacy Policy to continue.

    Thank You!

    আপোনাৰ প্ৰশ্নটো সফলতাৰে লাভ কৰা হৈছে।
    আপোনাক সংশ্লিষ্ট WhatsApp চেনেললৈ লৈ যোৱা হৈছে...

    Join WhatsApp Channel Now
    Supplementary guidance only and always follow your teachers.


    NoteSL

    FYUGP 1st to 6th Semester, along with Class 11 and Class 12 study materials, added to assist students in their exam preparation and academic studies. Access all the latest notes, solutions, and guides to boost your learning.

    notesl2026@gmail.com

    Quicks Links
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Terms & Conditions
    • Contact Us
    • Affiliate Disclosure
    Follow Us

    We share educational news & study materials on social media.


    Copyright © 2026 NoteSL. All rights reserved.


    Powered by Odoo - Create a free website