पद्य - 14
चरैवेति
बोध एवं विचार
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो:
1. कवि ने ‘चलते चलो’ का संदेश किसे दिया है?
उत्तर: कवि नरेश मेहता ने 'चलते चलो' का संदेश पूरी मानव जाति और विशेष रूप से प्रगति की राह पर अग्रसर होने वाले सक्रिय मनुष्यों को दिया है ।
2. कवि ने वसुधा को रत्नमयी क्यों कहा है?
उत्तर: कवि ने वसुधा (पृथ्वी) को 'रत्नमयी' इसलिए कहा है क्योंकि यह धरती अनेक प्रकार के प्राकृतिक संसाधनों और रत्नों से संपन्न है, जो मनुष्य के विकास के लिए आवश्यक हैं ।
3. कवि ने किस-किस के साथ निरंतर चलने का संदेश दिया है?
उत्तर: कवि ने सूरज, चंदा, संवत् (समय), युग और नूतन (नवीनता) के साथ-साथ निरंतर चलने का संदेश दिया है ।
4. किन पंक्तियों में कवि ने मनुष्य की सामर्थ्य और अजेयता का उल्लेख किया है?
उत्तर: कवि ने निम्नलिखित पंक्तियों में मनुष्य की सामर्थ्य का उल्लेख किया है:
"मानव जिस ओर गया, नगर बने, तीर्थ बने, तुम से है कौन बड़ा? गगन-सिंधु मित्र बने" ।
5. निरंतर प्रयत्नशील मनुष्य को कौन-कौन से सुख प्राप्त होते हैं?
उत्तर: निरंतर प्रयत्नशील मनुष्य को भूमि का भोग (सुख), विजय, मुक्ति और प्रगति के 'रंग-महल' जैसे सुख प्राप्त होते हैं। उसे नदियों के सोम (अमृत) पीने का सौभाग्य भी मिलता है ।
6. ‘रुकने को मरण’ कहना कहाँ तक उचित है?
उत्तर: 'रुकने को मरण' कहना पूर्णतः उचित है क्योंकि रुकना जड़ता और पतन का प्रतीक है। जिस प्रकार रुका हुआ पानी सड़ जाता है, वैसे ही कर्महीन व्यक्ति का जीवन व्यर्थ हो जाता है। जीवन का अर्थ ही गतिशीलता और प्रगति है ।
7. कवि ने मनुष्य को ‘तुमसे है कौन बड़ा’ क्यों कहा है?
उत्तर: कवि ने मनुष्य को ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि मनुष्य ने अपनी बुद्धि और पुरुषार्थ से दुर्गम स्थानों पर नगर और तीर्थ बसाए हैं। आकाश और समुद्र जैसे विशाल तत्वों को भी अपना मित्र बना लिया है। उसकी सामर्थ्य असीम है ।
8. ‘युग के ही संग-संग चले चलो’ - कथन का आशय स्पष्ट करो।
उत्तर: इस कथन का आशय यह है कि मनुष्य को समय की मांग और बदलते परिवेश के अनुसार खुद को ढालते हुए आगे बढ़ना चाहिए। हमें पुरानी रूढ़ियों को त्यागकर आधुनिकता और विकास के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहिए ।
9. नरेश मेहता ‘आस्था और जागृति’ के कवि हैं - कविता के आधार पर सिद्ध करो।
उत्तर: नरेश मेहता की कविता में 'चरैवेति' (चलते रहो) के माध्यम से मानव के उज्ज्वल भविष्य के प्रति अटूट आस्था प्रकट होती है । वे मनुष्य को अंधकार (तम) से निकलकर प्रकाश (सूरज) की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं, जो जागृति का प्रतीक है। उनकी कविता सोए हुए गौरव को जगाकर प्रगति पथ पर बढ़ने की प्रेरणा देती है ।
भाषा एवं व्याकरण ज्ञान
1. निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखो:
(क) जो दूसरों के अधीन हो
उत्तर: पराधीन
(ख) जो दूसरों के उपकार को मानता हो
उत्तर: कृतज्ञ
(ग) जो बच्चों को पढ़ाते हैं
उत्तर: शिक्षक/अध्यापक
(घ) जो गीत की रचना करते हैं
उत्तर: गीतकार
(ङ) जो खेती-बारी का काम करता हो
उत्तर: किसान/कृषक
2. निम्नलिखित समस्त-पदों के विग्रह कर समास का नाम लिखो:
पीतांबर, यथाशक्ति, अजेय, धनी-निर्धन, कमल-नयन, त्रिफला
उत्तर: पीतांबर: पीत (पीला) है जो अंबर (वस्त्र) — कर्मधारय समास (या पीला है अंबर जिसका अर्थात कृष्ण - बहुव्रीहि)।
यथाशक्ति: शक्ति के अनुसार — अव्ययीभाव समास।
अजेय: जिसे जीता न जा सके (न जेय) — नञ् तत्पुरुष समास।
धनी-निर्धन: धनी और निर्धन — द्वंद्व समास।
कमल-नयन: कमल के समान नयन — कर्मधारय समास।
त्रिफला: तीन फलों का समाहार — द्विगु समास।
3. निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग करो:
अपना उल्लू सीधा करना, आँखों का तारा, उन्नीस-बीस का अंतर, घी के दिए जलाना, जान पर खेलना, बाएँ हाथ का खेल
उत्तर:
अपना उल्लू सीधा करना (अपना स्वार्थ सिद्ध करना): आज के समय में लोग मित्रता भी अपना उल्लू सीधा करने के लिए करते हैं।
आँखों का तारा (बहुत प्यारा होना): श्रवण कुमार अपने माता-पिता की आँखों के तारे थे।
उन्नीस-बीस का अंतर (बहुत कम अंतर होना): इन दोनों जुड़वां भाइयों की शक्ल में बस उन्नीस-बीस का ही अंतर है।
घी के दिए जलाना (खुशियाँ मनाना): भगवान राम के अयोध्या लौटने पर नगरवासियों ने घी के दिए जलाए।
जान पर खेलना (साहसपूर्ण कार्य करना): भारतीय सैनिकों ने अपनी जान पर खेलकर देश की रक्षा की।
बाएँ हाथ का खेल (अति सरल कार्य): गणित के कठिन सवाल हल करना मेरे लिए बाएँ हाथ का खेल है।