अध्याय 5
चिट्ठियों की अनूठी दुनिया
अभ्यासमाला
बोध एवं विचार
1. सही विकल्प का चयन करो :
(क) पत्र को उर्दू में क्या कहा जाता है?
(अ) खत
(आ) चिट्ठी
(इ) कागद
(ई) लेख
उत्तर: (अ) खत
(ख) पत्र लेखन है—
(अ) एक तरीका
(आ) एक व्यवस्था
(इ) एक कला
(ई) एक रचना
उत्तर: (इ) एक कला
(ग) विश्व डाक संघ ने पत्र लेखन की प्रतियोगिता शुरू की—
(अ) सन् 1970 से
(आ) सन् 1971 से
(इ) सन् 1972 से
(ई) सन् 1973 से
उत्तर: (इ) सन् 1972 से
(घ) महात्मा गाँधी के पास दुनियाभर से तमाम पत्र किस पते पर आते थे—
(अ) मोहन दास करमचन्द गाँधी—भारत
(आ) महात्मा गाँधी—भारत
(इ) बापू जी—इंडिया
(ई) महात्मा गाँधी—इंडिया
उत्तर: (ई) महात्मा गाँधी—इंडिया
(ङ) तमाम सरकारी विभागों की तुलना में सबसे ज्यादा गुडविल किसकी है—
(अ) रेल विभाग
(आ) डाक विभाग
(इ) शिक्षा विभाग
(ई) गृह विभाग
उत्तर: (आ) डाक विभाग
2. संक्षिप्त उत्तर दो (लगभग 25 शब्दों में) :
(क) पत्र ऐसा क्या काम कर सकता है, जो संचार का आधुनिकतम साधन भी नहीं कर सकता?
उत्तर: पत्र राजनीति, साहित्य और कला के क्षेत्रों में विवाद और नई घटनाओं की जड़ होते हैं । पत्र जो संतोष और यादों को सहेजने का काम कर सकते हैं, वह आधुनिकतम साधन नहीं कर सकते ।
(ख) चिट्ठियों की तेजी अन्य किन साधनों के कारण बाधा प्राप्त हुई है?
उत्तर: आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी के युग में फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल जैसे संचार माध्यमों के अत्यधिक प्रसार के कारण चिट्ठियों के आदान-प्रदान की गति में कमी आई और उनकी तेजी बाधित हुई है ।
(ग) पत्र जैसा संतोष फोन या एसएमएस का संदेश क्यों नहीं दे सकता?
उत्तर: पत्र यादों को लंबे समय तक विरासत के रूप में सहेज कर रखते हैं , जबकि एसएमएस संदेशों को लोग जल्दी ही भूल जाते हैं । पत्रों में जो आत्मीय अनुभूति और भाव होते हैं, वे फोन या एसएमएस में प्राप्त नहीं होते ।
(घ) गाँधीजी के पास देश-दुनिया से आये पत्रों का जवाब वे किस प्रकार देते थे?
उत्तर: गांधीजी पत्रों का जवाब देने में बहुत मुस्तैद थे; वे पत्र मिलते ही उसका जवाब लिख देते थे । वे ज्यादातर अपने हाथों से लिखते थे और दाहिना हाथ थकने पर बाएँ हाथ से लिखने लगते थे ।
(ङ) कैसे लोग अब भी बहुत ही उत्सुकता से पत्रों का इंतजार करते हैं?
उत्तर: आज भी दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोग, जैसे—पहाड़ों पर रहने वाले, मछुआरे, और रेगिस्तान की ढाणियों के लोग खतों का बेसब्री से इंतजार करते हैं । विशेषकर हमारे सैनिक पत्रों का सबसे अधिक उत्सुकता से इंतजार करते हैं ।
3. उत्तर दो (लगभग 50 शब्दों में) :
(क) पत्र को खत, कागद, उत्तरम, लेख इत्यादि कहा जाता है। इन शब्दों से संबंधित भाषाओं के नाम बताओ।
उत्तर: पाठ के अनुसार, पत्र को विभिन्न भाषाओं में अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है । उर्दू में इसे खत कहा जाता है, जबकि संस्कृत में इसे पत्र के नाम से जाना जाता है । कन्नड़ भाषा में पत्र को कागद कहते हैं । तेलुगु भाषा में इसके लिए उत्तरम्, जाबू और लेख जैसे शब्दों का प्रयोग होता है । वहीं, तमिल भाषा में इसे कडिद कहा जाता है ।
(ख) पाठ के अनुसार भारत में रोज कितनी चिट्ठियाँ डाक में डाली जाती है और इससे क्या साबित होता है?
उत्तर: लेखक के अनुसार, भारत में अकेले ही प्रतिदिन लगभग साढ़े चार करोड़ चिट्ठियाँ डाक में डाली जाती हैं । यह विशाल संख्या इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि आज के डिजिटल और आधुनिक संचार युग में भी पत्रों का महत्व कम नहीं हुआ है । यह साबित करता है कि आम जनमानस के जीवन में पत्र आज भी अपनी कितनी गहरी अहमियत रखते हैं ।
(ग) क्या चिट्ठियों की जगह कभी फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल ले सकते हैं?
उत्तर: यद्यपि फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन और मोबाइल ने संचार की गति को बहुत तेज़ कर दिया है और पत्रों की संख्या को प्रभावित किया है, लेकिन वे कभी भी चिट्ठियों का स्थान पूरी तरह नहीं ले सकते । पत्र भावनाओं और यादों को सहेजने का जो कार्य करते हैं, वह आधुनिक साधन नहीं कर सकते । व्यापारिक डाक की बढ़ती संख्या और ग्रामीण क्षेत्रों में पत्रों की निर्भरता इसकी उपयोगिता को बनाए रखती है ।
(घ) किनके पत्रों से यह पता चलता है कि आजादी की लड़ाई बहुत ही मजबूती से लड़ी गयी थी?
उत्तर: आजादी के पहले के महासंग्राम के दौरान अंग्रेज अफसरों ने अपने परिवारजनों को जो पत्र लिखे थे, वे इस लड़ाई की गहराई को समझने का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गए हैं । इन पत्रों के ऐतिहासिक संकलन से यह स्पष्ट रूप से साबित होता है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम कितनी जमीनी मजबूती के साथ लड़ा गया था और इसने औपनिवेशिक शासन को किस हद तक प्रभावित किया था ।
(ङ) संचार के कुछ आधुनिक साधनों के नाम उल्लेख करो।
उत्तर: समय के साथ संचार के माध्यमों में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। पाठ में उल्लेखित कुछ प्रमुख आधुनिक संचार साधनों में टेलीफोन, मोबाइल, फैक्स, ई-मेल और इंटरनेट शामिल हैं । इसके अतिरिक्त एसएमएस (SMS) सेवा भी एक महत्वपूर्ण साधन है । हालाँकि ये साधन तेज़ और सुविधाजनक हैं, फिर भी ये पत्रों जैसी आत्मीयता और संतोष प्रदान करने में सक्षम नहीं हो पाए हैं ।
4. सम्यक् उत्तर दो (लगभग 100 शब्दों में) :
(क) पत्र लेखन की कला के विकास के लिए क्या-क्या प्रयास हुए?
उत्तर: पिछली शताब्दी में पत्र लेखन ने एक विशिष्ट कला का रूप ले लिया, जिसे विकसित करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रयास किए गए । सबसे पहले, डाक व्यवस्था में सुधार के माध्यम से पत्रों को सही दिशा देने की कोशिश की गई । पत्र संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दुनिया भर के देशों में स्कूली पाठ्यक्रमों में 'पत्र लेखन' का विषय शामिल किया गया, ताकि नई पीढ़ी इस कला से जुड़ सके । विश्व डाक संघ ने भी अपनी ओर से सराहनीय पहल की। संघ द्वारा सन् 1972 से 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पत्र लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित करने का सिलसिला शुरू किया गया । इन प्रयासों ने पत्रों के महत्व को आधुनिक युग में भी जीवित रखा है ।
(ख) वास्तव में पत्र किसी दस्तावेज से कम नहीं है—कैसे?
उत्तर: पत्र केवल संदेश भेजने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे ऐतिहासिक और साहित्यिक दस्तावेज के समान मूल्यवान होते हैं । पत्र यादों को सहेज कर रखते हैं और महान हस्तियों के पत्र तो आज भी विरासत और अनुसंधान का विषय हैं । उदाहरण के तौर पर, जवाहरलाल नेहरू द्वारा अपनी पुत्री इंदिरा गांधी को लिखे गए पत्र करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं । इसके अलावा, 'पंत के दो सौ पत्र बच्चन के नाम' और निराला के पत्रों के संग्रह ऐतिहासिक साक्ष्य के रूप में उपलब्ध हैं । गांधीजी और रवींद्रनाथ टैगोर के बीच 1915 से 1941 के पत्राचार का संग्रह 'महात्मा और कवि' के नाम से प्रकाशित है, जो उस समय के तथ्यों और उनकी मनोदशा का लेखा-जोखा प्रदान करता है ।
(ग) भारतीय डाकघरों की बहुआयामी भूमिका पर आलोकपात करो।
उत्तर: भारतीय डाक विभाग समाज को जोड़ने में एक अद्वितीय और बहुआयामी भूमिका निभाता है, जिससे इसकी 'गुडविल' अन्य सरकारी विभागों की तुलना में सर्वाधिक है । यह विभाग न केवल संदेश पहुँचाता है, बल्कि दुर्गम स्थानों जैसे बर्फीले पहाड़ों, रेगिस्तानों और दूरदराज के जंगलों में रहने वाले लोगों के लिए संपर्क का एकमात्र साधन है । आर्थिक दृष्टिकोण से भी इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है; देहाती इलाकों में लाखों घरों के चूल्हे आज भी डाक विभाग द्वारा लाई गई 'मनीआर्डर' अर्थव्यवस्था से ही जलते हैं । इसीलिए गाँवों और गरीब बस्तियों में डाकिया को एक 'देवदूत' के रूप में देखा जाता है, क्योंकि वह केवल पत्र ही नहीं, बल्कि उम्मीद और जीवन यापन का साधन भी लेकर आता है ।