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    पाठ : १

    भारत हमको जान से प्यारा है (गीत)

    अभ्यास-माला :

    1. प्रस्तुत गीत को सभी मिलकर एक साथ गाएँ। (यह कक्षा की गतिविधि है)

    उत्तर :

    भारत हमको जान से प्यारा है 
    सबसे न्यारा गुलिस्ताँ हमारा है 
    सदियों से भारत भूमि दुनिया की शान है 
    भारत माँ की रक्षा में जीवन कुर्बान है 
    भारत हमको जान से.....

    उजड़े नहीं अपना चमन, टूटे नहीं अपना वतन 
    दुनिया भर धरती कोरी, बरबाद ना करदे कोई 
    मंदिर वहाँ, मस्जिद वहाँ, हिंदू यहाँ मुस्लिम वहाँ 
    मिलते रहे हम प्यार से
    जागो..........

    हिंदुस्तानी नाम हमारा है, 

    सबसे प्यारा देश हमारा है
    जन्मभूमि है हमारी शान से कहेंगे हम 
    सभी तो भाई-भाई प्यार से रहेंगे हम 
    हिंदुस्तानी नाम हमारा है

    असम से गुजरात तक, बंगाल से महाराष्ट्र तक 

    इनके सभी गुण एक हैं, भाषा अलग सुर एक हैं 
    कश्मीर से मद्रास तक, कह दो सभी हम एक है 
    आवाज दो हम एक है
    जागो....



    2. गीत को ध्यान से पढ़ो और सही कथनों के आगे ☑️ और गलत कथन के आगे ✖️ का निशान लगाओ :

    (क) सबके लिए अपना देश जान से प्यारा होता है। [ ☑️ ]
    उत्तर : [ ☑️ ]

    (ख) सदियों से भारत दुनिया का गौरव रहा है। 
    उत्तर : [ ☑️ ]

    (ग) यह कोई नहीं चाहता कि उसका देश टूट कर अलग हो जाए। 

    उत्तर : [ ☑️ ]

    (घ) हमारे देश में हिंदू-मुसलमानों में एकता नहीं है। 
    उत्तर : [ ✖️ ]

    (ङ) हम सब भारतवासी हैं। 
    उत्तर : [ ☑️ ]

    (च) भारत में अनेक भाषाएँ प्रचलित हैं। 
    उत्तर : [ ☑️ ]

    3. नीचे दिए गए गीतांश के भाव को अपनी भाषा में लिखो :
    असम से गुजरात तक, बंगाल से महाराष्ट्र 
    तक
    इनके सभी गुण एक हैं, भाषा अलग सुर एक हैं 
    कश्मीर से मद्रास तक, कह दो सभी हम एक हैं 
    आवाज दो हम एक हैं 
    जागो....

    उत्तर : 
    प्रस्तुत पंक्तियाँ प्रसिद्ध देशभक्ति गीत 'भारत हमको जान से प्यारा है' से ली गई हैं। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि भारत की 'अनेकता में एकता' के अद्भुत स्वरूप का वर्णन कर रहे हैं। कवि कहते हैं कि भारत एक विशाल देश है जो भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध है। असम से गुजरात और बंगाल से महाराष्ट्र तक, भारत के हर कोने में अलग-अलग भाषाएँ बोली जाती हैं, अलग-अलग वेशभूषा पहनी जाती है और खान-पान भी भिन्न है। लेकिन इन विविधताओं के बावजूद, हम सभी भारतीयों के गुण और संस्कार एक समान हैं। हमारी भाषाएँ अलग हो सकती हैं, पर राष्ट्रप्रेम का 'सुर' यानी हमारी भावना एक ही है।
    उत्तर में बर्फीले कश्मीर से लेकर दक्षिण में समुद्र तट वाले मद्रास (चेन्नई) तक, हम सभी एक सूत्र में बंधे हुए हैं। कवि यहाँ देशवासियों को जागृत करते हुए संदेश देते हैं कि हमें अपनी क्षेत्रीय पहचान से ऊपर उठकर सबसे पहले खुद को भारतीय मानना चाहिए। यह पंक्तियाँ हमें सिखाती हैं कि चाहे बाहरी तौर पर हम कितने भी अलग दिखें, आंतरिक रूप से हम एक ही भारत माता की संतानें हैं। हमें एकजुट होकर पूरी दुनिया को यह बताना चाहिए कि भारत की असली शक्ति इसकी एकता में है।

    2. तुम्हारे संकलन में आए गीतों की एक तालिका बनाओ : (नीचे दी गई तालिका को आप अपनी पसंद के गीतों से भर सकते हैं)

    उत्तर : 

    क्रमिक संख्या

    गीत की पहली पंक्ति

    फ़िल्म का नाम

    संगीतकार का नाम

    गायक का नाम

    1

    मेरे देश की धरती

    उपकार

    कल्याणजी-आनंदजी

    महेंद्र कपूर

    2.

    ऐ वतन, वतन मेरे आबाद रहे तू

    राजी

    शंकर-एहसान-लॉय

    अरिजीत सिंह

    3.

    संदेशे आते हैं

    बॉर्डर

    अनु मलिक

    रूप कुमार राठौड़, सोनू निगम

    4.

    माँ तुझे सलाम

    वन्दे मातरम (एल्बम)

    ए.आर. रहमान

    ए.आर. रहमान


    3. भारत भूमि सदियों से 'दुनिया की शान' बनी रही, इसके कारण क्या-क्या हो सकते हैं? कक्षा में चर्चा करो।

    उत्तर : 
    भारत सदियों से 'दुनिया की शान' रहा है। इसकी महानता का मुख्य कारण यहाँ की 'विविधता में एकता' है। हमारे देश में हिंदू, इस्लाम, सिख, ईसाई और बौद्ध जैसे विभिन्न धर्म फल-फूल रहे हैं, जो हमें प्रेम, शांति और भाईचारे की समान सीख देते हैं। राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए हमें जाति-पाति और प्रांतीयता के भेदभाव को त्यागकर 'भारतीय' होने पर गर्व करना चाहिए। हमारी मातृभूमि के प्रति हमारा यह कर्तव्य है कि हम इसके गौरव की रक्षा करें और देश की प्रगति में अपना योगदान दें। जैसा कि कहा गया है— "जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी" (माता और मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं)। अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए मैं निम्नलिखित संकल्प लेता हूँ:
    1. मैं सदैव देश के संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों (तिरंगा, राष्ट्रगान) का सम्मान करूँगा।

    2. समाज में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने का प्रयास करूँगा।

    3. देश के संसाधनों जैसे जल और पर्यावरण को सुरक्षित रखूँगा।

    4. स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करूँगा ताकि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो।

    5. संकट के समय तन-मन-धन से देश की सेवा के लिए तत्पर रहूँगा।

    5. अपने देश या मातृभूमि के लिए हमारा क्या कर्तव्य होना चाहिए?  आपस में चर्चा करो और लिखो।

    उत्तर :  मातृभूमि के प्रति हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य उसकी एकता और अखंडता की रक्षा करना है। हमें देश के कानूनों का पालन करना चाहिए, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए और समाज में भाईचारा बनाए रखना चाहिए। मातृभूमि के प्रति हमारे कर्तव्य - 

    1. राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान: हमें अपने तिरंगे झंडे और राष्ट्रगान का हमेशा हृदय से सम्मान करना चाहिए। यह हमारे देश की अस्मिता का प्रतीक है।

    2. देश की एकता और अखंडता की रक्षा: हमें ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे देश की एकता को खतरा हो। हमें जाति, धर्म और भाषा के भेदभाव से ऊपर उठकर 'भारतीय' बनकर रहना चाहिए।

    3. संविधान और नियमों का पालन: एक आदर्श नागरिक के रूप में हमें देश के संविधान द्वारा बनाए गए कानूनों और नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करना चाहिए।

    4. राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा: सार्वजनिक संपत्ति जैसे—रेल, बस, सरकारी भवन और ऐतिहासिक स्मारकों को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए। इनकी रक्षा करना हमारा व्यक्तिगत कर्तव्य है।

    5. पर्यावरण संरक्षण: अपनी मातृभूमि को हरा-भरा और स्वच्छ रखना हमारा उत्तरदायित्व है। हमें पेड़ लगाने चाहिए और जल, वायु तथा मिट्टी को प्रदूषित होने से बचाना चाहिए।

    6. शिक्षा और आत्मनिर्भरता: हमें मन लगाकर पढ़ाई करनी चाहिए ताकि हम ज्ञानवान बनकर देश की आर्थिक और सामाजिक उन्नति में योगदान दे सकें।

    7. भाईचारा और सद्भाव: समाज में सभी धर्मों और समुदायों के लोगों के साथ प्रेम और भाईचारे का व्यवहार करना चाहिए ताकि देश में शांति बनी रहे।

    8. सांस्कृतिक विरासत का सम्मान: भारत की गौरवशाली संस्कृति, कला और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए और उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास करना चाहिए।

    9. देश सेवा के लिए तत्परता: जब भी देश पर कोई आपदा या संकट आए, हमें अपनी क्षमता के अनुसार तन, मन और धन से सेवा के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।

    10. सत्य और अहिंसा का मार्ग: हमें गांधीजी के सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलना चाहिए और समाज में हो रही बुराइयों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठानी चाहिए।

    6. राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए हमें क्या-क्या करना चाहिए ? आपस में चर्चा करो और लिखो।

    उत्तर : राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के उपाय -

    1. सर्वधर्म समभाव: हमें सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करना चाहिए। धार्मिक कट्टरता को त्यागकर आपसी भाईचारे और सहिष्णुता को बढ़ावा देना चाहिए।

    2. भाषाई सौहार्द: भारत एक बहुभाषी देश है। हमें अपनी मातृभाषा के साथ-साथ दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं का भी सम्मान करना चाहिए ताकि भाषा कभी विवाद का कारण न बने।

    3. जातिवाद का अंत: समाज में फैली ऊंच-नीच और जातिवाद की भावना को जड़ से खत्म करना चाहिए। हम सबको एक समान 'भारतीय' समझना ही राष्ट्रीय एकता की पहली शर्त है।

    4. सांस्कृतिक आदान-प्रदान: विभिन्न राज्यों के त्योहारों, खान-पान और कलाओं को अपनाना चाहिए। जब हम एक-दूसरे की संस्कृति को जानेंगे, तभी जुड़ाव महसूस करेंगे।

    5. राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान: तिरंगा झंडा, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीतों के प्रति मन में गहरी श्रद्धा रखनी चाहिए। ये प्रतीक हमें एक सूत्र में बांधते हैं।

    6. समान शिक्षा प्रणाली: शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो बच्चों के मन में बचपन से ही देशभक्ति और मानवता के संस्कार डाले। महापुरुषों की जीवनियाँ हमें एकता की प्रेरणा देती हैं।

    7. अफवाहों से बचाव: सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैलने वाली सांप्रदायिक और भड़काऊ अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और न ही उन्हें आगे बढ़ाना चाहिए।

    8. क्षेत्रवाद पर रोक: "पहले मेरा राज्य, फिर मेरा देश" वाली सोच के बजाय "देश पहले" (Nation First) की भावना विकसित करनी चाहिए। संकुचित क्षेत्रीय हितों से ऊपर उठना आवश्यक है।

    9. सामाजिक न्याय और समानता: समाज के गरीब और पिछड़े वर्गों को साथ लेकर चलना चाहिए। जब देश के हर नागरिक को विकास के समान अवसर मिलेंगे, तभी राष्ट्र एकजुट होगा।

    10. राष्ट्रीय उत्सवों में सहभागिता: स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों को पूरे देश में बिना किसी भेदभाव के मिल-जुलकर धूमधाम से मनाना चाहिए।

    7. 'भाषा अलग सुर एक हैं'- हमारे देश में अनेक भाषाएँ एवं बोलियाँ प्रचलित हैं। भारत की कुछ भाषाओं के नाम लिखो और उल्लेख करो कि वे मुख्य रूप से किस राज्य में बोली जाती हैं ?

    उत्तर :  

    भाषा का नाम

    किस राज्य में यह भाषा बोली जाती है

    1. असमिया

    असम

    2. बांग्ला

    पश्चिम बंगाल

    3. गुजराती

    गुजरात

    4. मराठी

    महाराष्ट्र

    5. तमिल

    तमिलनाडु


    8. हमारे देश के मानचित्र को ध्यान से देखो और सामूहिक रूप से देश के सभी राज्यों को पहचान कर उसकी एक तालिका बनाओ।

    उत्तर :  


    क्रमिक संख्याराज्य का नामराजधानी
    1असमदिसपुर
    2अरुणाचल प्रदेशईटानगर
    3आंध्र प्रदेशअमरावती
    4बिहारपटना
    5छत्तीसगढ़रायपुर
    6गोवापणजी
    7गुजरातगांधीनगर
    8हरियाणाचंडीगढ़
    9हिमाचल प्रदेशशिमला
    10झारखंडरांची
    11कर्नाटकबेंगलुरु
    12केरलतिरुवनंतपुरम
    13मध्य प्रदेशभोपाल
    14महाराष्ट्रमुंबई
    15मणिपुरइंफाल
    16मेघालयशिलांग
    17मिजोरमआइजोल
    18नागालैंडकोहिमा
    19ओडिशाभुवनेश्वर
    20पंजाबचंडीगढ़
    21राजस्थानजयपुर
    22सिक्किमगंगटोक
    23तमिलनाडुचेन्नई
    24तेलंगानाहैदराबाद
    25त्रिपुराअगरतला
    26उत्तर प्रदेशलखनऊ
    27उत्तराखंडदेहरादून
    28पश्चिम बंगालकोलकाता


    9. निम्नलिखित कविता की पंक्तियों को पढ़कर उसका मूलभाव लिखो और एक उचित शीर्षक दो :

     भारत देश महान है।

    ​तीन रंग का इसका झंडा,

    यह भारत की शान है।।

    इस झंडे को नमन करें हम,

    यह हम सबकी शान है।

    भारत देश महान है।।

    कलकल-कलकल बहती नदियाँ,

     करती यश का गान हैं।

    ​भारत देश महान है।।


    उत्तर :  प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारे देश भारत की गौरवगाथा और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अटूट श्रद्धा को प्रकट करती हैं। कवि इन पंक्तियों के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि भारत की महानता केवल उसके भूगोल में नहीं, बल्कि उसके प्रतीकों और प्राकृतिक सौंदर्य में निहित है।

    सबसे पहले, कवि तिरंगे झंडे की बात करते हैं। केसरिया, सफेद और हरे रंग से बना यह ध्वज केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के त्याग, शांति और समृद्धि का प्रतीक है। यह हमारी 'शान' है, जिसे देखकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊँचा हो जाता है। कवि हमें इस ध्वज को 'नमन' करने की प्रेरणा देते हैं, जिसका अर्थ है कि हमें अपने देश की संप्रभुता और मान-सम्मान की रक्षा के लिए सदैव समर्पित रहना चाहिए।

    इसके बाद, कविता भारत की प्राकृतिक सुंदरता का चित्रण करती है। 'कलकल' बहती नदियाँ न केवल हमारी प्यास बुझाती हैं, बल्कि वे भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की साक्षी भी हैं। उनकी मधुर ध्वनि ऐसा प्रतीत होती है मानो वे गीत गाकर पूरी दुनिया में भारत की कीर्ति और यश का बखान कर रही हों।

    निष्कर्ष: संपूर्ण कविता का सार यह है कि भारत एक महान राष्ट्र है। इसकी नदियाँ, पर्वत और हमारा राष्ट्रीय ध्वज—सभी हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और देश के प्रति गौरव महसूस करने की सीख देते हैं। यह कविता हमारे भीतर देशभक्ति की भावना को जागृत करती है और हमें एक सूत्र में पिरोती है।

    भाषा-अध्ययन :

    1. "जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी" - इस कथन का मूल भाव स्पष्ट करो और अपनी जन्मभूमि की रक्षा के लिए तुम क्या करोगे, पाँच वाक्यों में लिखो :

    (क) _______________________________________

    (ख) _______________________________________

    (ग) _______________________________________

    (घ) _______________________________________

    (ङ) _______________________________________

    उत्तर : "जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी" का भाव और पाँच वाक्य:

    मूल भाव: माँ और मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर (श्रेष्ठ) होती हैं। जिस प्रकार माँ हमें जन्म देती है, वैसे ही जन्मभूमि हमारा पालन-पोषण करती है।

    जन्मभूमि की रक्षा के लिए मैं ये कार्य करूँगा/करूँगी:

    • (क) मैं अपने देश के तिरंगे और संविधान का हमेशा सम्मान करूँगा।

    • (ख) मैं देश में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने में मदद करूँगा।

    • (ग) मैं पढ़-लिखकर एक जिम्मेदार नागरिक बनूँगा ताकि देश की उन्नति में योगदान दे सकूँ।

    • (घ) देश पर संकट आने पर मैं अपनी जान की परवाह किए बिना रक्षा के लिए तत्पर रहूँगा।

    • (ङ) मैं देश की स्वच्छता और पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संकल्प लेता हूँ।

    भारत हमको जान से प्यारा है पाठ के 25 MCQ













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